मनरेगा में हर हाथ को काम और दाम देने की मंशा नई
पद्धति की भेंट चढ़ गई है। अनियमितताओं पर लगाम लगाने को मजदूरों को अब
आनलाइन मजदूरी का भुगतान किया जाता है। जिसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर काम
करने के बाद जिम्मेदारों द्वारा उनके मस्टर रोलों को कंप्यूटराइज्ड ढंग से
बैंक तक भेजना होता है, जिसमें ही लापरवाही बरतने से जनपद के करीब आठ हजार
मजदूरों को अभी तक भुगतान नहीं हुआ और करीब छह करोड़ रुपये की रकम आनलाइन
प्रक्रिया में फंसी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ही लोगों को काम देने के
लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को संचालित किया है। जिसके तहत ग्रामीण
क्षेत्र में जाब कार्ड बनाकर लोगों को काम दिया गया। मनरेगा से प्रत्येक
जाबकार्ड धारक को 100 दिन का काम देने के निर्देश हैं, लेकिन जिम्मेदारों
की लापरवाही के चलते जाबकार्ड धारकों को एक तो 100 दिन का काम नहीं मिल रहा
और जो काम कर रहे हैं, उन्हें भुगतान तक नहीं हो रहा है।
मनरेगा में
जाबकार्ड धारकों की बीते कई माह से मजदूरी नहीं मिली है, ऐसे में मजदूर
परेशान हैं वहीं हर हाथ काम और दाम देने की सरकार की मंशा को भी ग्रहण लग
रहा है। जाबकार्ड धारकों को अभी तक मैनुअल ढंग से मजदूरी का भुगतान होता
था, पर राशि में हेरफेर भी कर लिया गया। जिसको लेकर ही सरकार ने जाबकार्ड
धारकों की मजदूरी का भुगतान करने की आनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी।
सरकार ने
इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा ही जाबकार्ड धारकों को मजदूरी
का भुगतान करने के निर्देश दिए, पर यही प्रक्रिया अब मजदूरोें के लिए
परेशानी का सबब बन गई है। जिम्मेदारों की लापरवाही और उदासीनता से आनलाइन
प्रक्रिया के कारण जनपद के 7956 जाबकार्ड धारकों का 605.49659 लाख रुपये का
भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में जाबकार्ड धारक काफी परेशान हैं।