मूक बधिर शिविर में विकलांग बच्चों को गुणवत्ता विहीन
भोजन खाने आठ बच्चों की हालत खराब हो गई। उनमें से दो की हालत गंभीर होने
पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ज्ञात हो कि समेकित शिक्षा के
अंतर्गत नगर संसाधन केंद्र में दो विकलांग शिविर संचालित हैं। जहां दृष्टि
बाधित व मूक बधिर बच्चों को दस माह का आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विकलांग शिविर में बच्चों के लिए व्यापक व्यवस्था न होने के कारण एक बच्चे
की ठंड से मौत हो गई थी।
इसके बाद वहां पर व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई थी।
दुबारा कैंप शुरू होने पर शिविर में व्यवस्थाएं तो दुरुस्त हो गईं, पर वहां
पर भोजन की व्यवस्था सहीं नहीं हुई। शिविर में अधपका और गुणवत्ता युक्त
भोजन दिया जा रहा था। इससे वहां पर रहने वाले विकलांग बच्चाें की सेहत खराब
होने लगी।
उनमें उल्टी दस्त की समस्या बढ़ गई। इससे शनिवार को दो बच्चे
बीमार हो गए थे। उनको जिला अस्पताल लाया गया। जहां से इलाज बाद उनको शिविर
में भेज दिया गया। मंगलवार को शिविर में दृष्टि बाधित बच्चों की तबियत फिर
खराब हो गई।
शिविर में मौजूद दृष्टि बाधित सचिन, शानू, सुहेल,
सुमेंद्र, रवि, सुनहरी और मूक बधिर पवन, मुस्कान बीमार हो गई। इनको एक निजी
चिकित्सक के पास ले जाया गया। जहां हालत गंभीर होने पर सचिन व शानू को
जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिला अस्पताल के चिकित्सक के अनुसार
भोजन के कारण ही बच्चाें में बार बार उल्टी दस्त की शिकायत हो रही है। वहीं
अस्पताल में भर्ती बच्चों ने बताया कि जो भोजन दिया जाता है, वह कच्चा
होता है। जिसको खाने का मन नहीं करता है।
इस बाबत वार्डन अंशु यादव का कहना
है कि भोजन देने की जिम्मेदारी एक संस्था की है। जिसको समय समय पर चेतावनी
दी जाती है, साथ ही विभागीय अफसरों को भी सूचना दी जा चुकी है। इस बाबत
डीसी आशा वर्मा से वार्ता करने की कोशिश की गई, पर संपर्क नहीं हो सका।