सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मदान बी लोकुर के
निर्देश पर जनपद न्यायाधीश नरेश जैन ने शनिवार को किशोर न्याय बोर्ड से
संबंधित मामलों की मानीटरिंग को बैठक की। जिसमें जिला जज ने किशोर न्याय
अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
उच्चतम
न्यायालय के निर्देश पर शनिवार को हुई बैठक में किशोर न्याय बोर्ड के
प्रधान मजिस्ट्रेट सुदीप कुमार जायसवाल ने जिला जज के समक्ष एजेंडा
प्रस्तुत किया। बैठक में कई क्षेत्रों के जिम्मेदारों से भी सुझाव मांगे
गए। बैठक में बाल संप्रेक्षण के बाल अपचारियों के सर्वांगीण विकास को लेकर
चर्चा हुई।
बच्चों के स्वास्थ्य शिक्षा तथा गुणवत्तापरक भोजन को लेकर चर्चा
हुई। बैठक के एजेंडे में हिरासत में लाए गए किशोर हेतु प्रतीक्षालय,
अधिवक्तागण तथा विजिटर्स व साक्षीगणों के लिए बड़ा कक्ष, प्रधान मजिस्ट्रेट
व तथा सदस्य गण के हेतु चैंबर, रिकार्ड रूम, फ ोटो काफी मशीन व दूरभाष की
उपलब्धता को लेकर चर्चा हुई।
वहीं वादों के शीघ्र निस्तारण, संप्रेक्षण गृह
की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, कानूनी सहायता, पोष्टिक आहार आदि प्रमुख
मुद्दों पर चर्चा हुई। जिला जज ने निर्देश दिए कि हर थाने पर बाल
अपचारियों के मामलों को देखने को विशेष पुलिस अधिकारी नामित किए जाएं और
उसका नाम भी थाने के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित किया जाए।
बैठक में बाल
संप्र्रेक्षण गृह अधिकारी की अनुपस्थिति पर जिला जज ने नाराजगी जाहिर करते
हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी गंभीर बैठकों में वह व्यक्तिगत रूप से
उपस्थित रहे। जिला जज ने निर्देश दिए कि बच्चों की उचित शिक्षा के लिए
बीएसए को लिखा जाए, वहीं जो बच्चे बाल संप्रेक्षण गृह से निकलकर शिक्षा
ग्रहण करना चाहते हैं, उनका प्रवेश समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम
पद्धति विद्यालयों में कराया जाए।
बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
कराने का भी निर्देश जिला जज ने दिए। बैठक में अपर जिला जज प्रथम कमला
सिंह यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय आजाद, विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव
सिविल जज श्याम शंकर, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य संतराम व निर्मला देवी, जिला समाज कल्याण अधिकारी एसएस श्रीवास्तव आदि मौजूद
थे।