सूबे में पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र के पहले दिन ही जिले के परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। कक्षाओं मेें अस्त-व्यस्त फर्नीचर, स्कूल परिसर में गंदगी और घास देखने को मिली। वहीं कई विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं पाई गई।
बुुधवार को अधिकांश विद्यालयोें में 10 से 15 फीसदी छात्र ही उपस्थित हुए। स्कूलों में बच्चों का पहला दिन मौज मस्ती में ही बीत गया। मांटेसरी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर मारामारी दिखी। वहीं माध्यमिक विद्यालयों में कई अध्यापक मूल्यांकन ड्यूटी के चलते स्कूल नहीं पहुंचे।
नतीजतन इन स्कूलों के बच्चे अपने कक्षाध्यापकों को ढूंढते नजर आए। कुल मिलाकर नया शिक्षा सत्र तो शुरू हो गया लेकिन अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ाई कब शुरू होगी, यह कहना अभी मुश्किल है। इस बाबत जिम्मेदारों ने कहा कि व्यवस्थाएं बिगड़ी हैं, उन्हें ठीक कराकर जल्द ही कक्षाओं में पढ़ाई शुरू कराई जाएगी।
अपनी पिछली कक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद नए क्लास में बैठने का अलग ही उत्साह होता है। ऐसा ही उत्साह बच्चों में बुधवार को दिखाई दिया। पहले दिन शहर के अधिकांश स्कूलों में बच्चों की संख्या कम रही लेकिन बच्चे खासे उत्साहित दिखे।
बाल विहार, राम जूनियर, वेणीमाधव, आर्य कन्या पाठशाला, जीआईसी, जीजीआईसी, आरआर इंटर कालेज, सनातन धर्म इंटर कालेज आदि स्कूलों में नवीन शैक्षिक सत्र के पहले दिन बच्चों ने अपनी नई कक्षा के विषय में पता किया और वहां जाकर बैठे।
शहर के परिषदीय विद्यालयाें में कन्या जूनियर हाई स्कूल बहरा सौदागर, प्राथमिक पाठशाला बहरा सौदागर, कन्या पाठशाला रेलवेगंज सहित अन्य स्कूलों में बच्चे पहले दिन पहुंचे जरूर लेकिन उनकी उपस्थिति बमुश्किल 10 से 15 फीसदी ही रही।
करीब 90 प्रतिशत शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पहले दिन बच्चे खेलकूद में ही अपना समय गुजारते नजर आए। स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना था कि जल्द ही कक्षाएं शुरू करा दी जाएंगी। पहले दिन नई कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
कटियारी क्षेत्र के स्कूलों में कहीं शौचालय में गंदगी का अंबार मिला तो कहीं विद्यालय की बाउंड्रीवाल ही टूटी मिली। ककरा स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में टूटा फर्नीचर, जर्जर शौचालय, ज्योतिपुरवा प्राथमिक विद्यालय में बच्चोें के बैठने के लिए टाट फट्टी तक नहीं थी।
नादखेड़ा स्थित विद्यालय में बाउंड्रीवाल नहीं थी और गंदगी की भरमार थी। ज्योतिपुरवा के उच्च प्राथमिक में बाउंड्रीवाल टूटी थी। पेयजल की समस्या बच्चोें को परेशान कर रही थी। शौचालय के दरवाजे टूटे होने से बच्चे शौच के लिए खेत की ओर जाते दिखे।
कस्बा स्थित कन्या जूनियर स्कूल की तो बाउंड्रीवाल ही गायब थी। इससे आवारा जानवर बेरोक टोक आ-जा रहे थे। पूछने पर प्रधानाचार्य भी कुछ बताने से कतराते रहे। इन अव्यवस्थाओं के बीच किसी भी विद्यालय में बच्चों के नामांकन का आंकड़ा एक दर्जन को भी पार नहीं कर सका।