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‘शिक्षा से खुशहाली, पेड़ों से हरियाली’

Sat, 06 Jun 2015 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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भारत ऋषि-मुनियों का देश कहा जाता है, जो वनों में ही ध्यान व तपस्या में लीन रहते हैं, पर भौतिकतावाद ने भारतीय संस्कृति को आहत करते हुए वनों को ही काट डाला, जिससे पर्यावरण से छेड़छाड़ के बाद सूखा और बाढ़ की आपदा से भी मनुष्यों को सामना करना पड़ गया।
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यदि अब भी पर्यावरण के प्रति लोग न चेते तो परिणाम सभी के लिए दुष्कर साबित हो सकते हैं।यह बात वन प्रभाग हरदोई द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को कोयलबाग कालोनी में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि डा. अरुण मौर्य ने कही।\

उन्होंने कहा कि लाख दुखद परिणामों को देखने के बाद भी पर्यावरण को छेड़ना मनुष्य लगातार जारी रखे हुए हैं। उन्होंने भौतिकतावाद में फंसे लोगों को चेताते हुए बताया कि धरती का औसत तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। जल्द ही धरती का तापमान तीन डिग्री ऊपर चला जाएगा।
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अनुमान है कि धरती का तापमान बढ़ने से भारत में ही धरती का तापमान पांच-छह डिग्री ऊपर जा सकता है। कहा कि ग्लेशियर का तेजी से पिघलना इसका परिचायक है, जिससे पीने के पानी का संकट बढ़ता दिख रहा और लोगों के सामने बाढ़ व सूखे का खतरा भी पैदा होता जा रहा, फिर भी लोग इसको लेकर चेत नहीं रहे हैं।

सेवानिवृत्त प्राचार्य वीएस पांडे ने कहा कि पृथ्वी एक अद्भुत उपग्रह है। इसमें जीवन के समस्त तत्व उपलब्ध हैं, पर मनुष्य ही है, जो अपनी कार्यशैलियों से लगातार इसमें जहर घोलने का काम कर रहा है। अध्यक्षता करते हुए उप प्रभागीय वनाधिकारी पीके सिंह ने कहा कि विश्व पर्यावरण की शुरुआत पांच जून 1972 को स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में की गई।

उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में भी लोगों को जानकारी दी और उससे पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की भी चर्चा की। संचालन उप वन रेंजर रत्नेश श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर रेंजर वीएस सचान समेत कई लोग मौजूद थे। उधर, उन्मुख व सुभाष कल्याण मंच के तत्वावधान में स्वामी रामकृष्ण परमहंस बालिका इंटर कालेज मलिहामऊ में पौधे रोपे गए, जिसमें आम, नीम, गोल्ड मोहर, अमरूद, अशोक आदि लगाए।

इस मौके पर संस्था संरक्षक श्याम जी मिश्र ने कहा कि पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने को ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है। मनीष मिश्र व साहित्यकार रामदेव बाजपेई ने कहा कि आज के दौर में पेड़ों का कटान व्यापक स्तर पर हो रहा, जो गलत है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

संयोजक अजीत शुक्ल ने कहा कि वृक्ष धरा के आभूषण हैं। हम सबका दायित्व है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। सिर्फ वर्ष में एक दिन ऐसे कार्यक्रम कर अपने दायित्वों की इतिश्री न कर लें। रवि नारायण मिश्र ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। हम सभी पौधरोपण करें और दूसरों को भी इस ओर प्रेरित करें।
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