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Hardoi News: बदलते मौसम में सता रहा कान व गले का संक्रमण, बच्चे व बुजुर्ग प्रभावित

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हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की ओपीडी में इन दिनों ईएनटी विभाग के आगे मरीजाें की लंबी लाइन लगी हुई है।
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रोजाना 350 से अधिक मरीज चिकित्सीय परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। कान और गले के संक्रमण से बच्चों से लेकर बड़े तक परेशान हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव से गले में टॉन्सिलाइटिस और खराश की समस्या बढ़ गई है। वहीं, बुजुर्ग कान में दर्द की समस्या से ग्रसित होकर इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
इन दिनों लगातार मौसम बदल रहा है कभी मौसम ठंडा हो रहा है तो कभी भीषण उमस बेहाल किए हुए है। बदलते मौसम के कारण बीमारियां भी इन दिनों बढ़ी हैं। रोजाना ओपीडी में 18 सौ से दो हजार मरीज चिकित्सीय परामर्श के लिए आ रहे हैं। इनमें से करीब 350 से अधिक मरीज तो सिर्फ नाक, कान और गला विभाग में पहुंच रहे हैं। इनके कान और गले में संक्रमण मिल रहा है। गले में खराश और टाॅन्सिल की समस्या बच्चों में काफी देखने को मिल रही है। ईएनटी चिकित्सक डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि बच्चों के टॉन्सिल में सूजन और बड़ों में फंगल से कान में दर्द हो रहा है। बुजुर्गाें में ओटाइटिस मीडिया एक्यूट व बच्चों में ओटोमाइकोसिस के लक्षण पाए जा रहे हैं।
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दो सप्ताह में दिखने लगते हैं टॉन्सिल के लक्षण
ईएनटी सर्जन डॉ. विवेक सिंह के मुताबिक टॉन्सिल के लक्षण दो सप्ताह बाद नजर आने लगते हैं। निगलने में दिक्कत होती है। दवाओं के सेवन से एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाता है। बताया कि इससे बचाव के लिए नमक वाले गुनगुने पानी से गरारा करें, ठंडे तरल पदार्थ का सेवन कम करें, आसानी से चबाने वाले खाने का सेवन करें, बाहरी चीजों के खाने से परहेज करें।
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फंगल इंफेक्शन बना सकता बहरा
ओटाइटिस मीडिया के संक्रमण से कान में तेज दर्द होना, बुखार आना, कान का बहना और कम सुनाई देना व भारीपन महसूस होना। बारिश का गंदा पानी कान में जाना, जो फंगल इंफेक्शन का कारण बन रहा है। समय से चिकित्सीय सलाह और उपचार नहीं लिया गया तो स्थायी बहरापन होना संभव है।
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