हरदोई। जिले में बढ़ते जल दोहन के बीच गिरता जल स्तर खतरे की घंटी बजा रहा है। इसके बाद भी जल संचयन को लेकर जिम्मेदार बेखबर हैं। वहीं आम लोग पानी की बर्बादी को रोकने एवं अनावश्यक रूप से पानी के खर्च पर अंकुश लगाने के प्रति जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। बिना जरूरत के खुले रहने वाले नल, सड़कों पर धुलते वाहनों से बहता पानी और जरूरत से ज्यादा पानी खर्च करना लोगों का शगल सा बना हुआ है। पेश है एक रिपोर्ट -
पिछले साल दो मीटर तक गिरा था जलस्तर
हरदोई। पिछले साल करीब दो मीटर तक जल स्तर शहर में गिर गया था। शासन के निर्देशों के बाद भी सरकारी भवनों से लेकर निजी बडे़ भवनों में जल संचयन की व्यवस्था नहीं की जा रही है। पिछले वर्ष नई बोरिंग गहराई में करानी पड़ी। दस साल पूर्व तक शहर में औसतन बोरिंग 80 फिट होती थी व पानी खींचने के लिए मोटर आधा हार्स पावर से एक हार्सपावर वाले से पानी टंकी तक पहुंच जाता था मगर अब औसत बोरिंग 100 से 120 फिट हो रही है और टुल्लू के स्थान पर सबमर्सिबल लगाना पड़ रहा है। सबमर्सिबल और बोरिंग कराने वाले जी.जी. सिंह ने बताया कि गिरते जल स्तर के कारण सबमर्सिबल लगाने की आवश्यकता पड़ रही है।
भवनों के लिए लागू है वाटर हार्वेस्टिंग के मानक
हरदोई। जनपद का भौगोलिक क्षेत्रफल 5986 वर्ग किलोमीटर के आस पास है। शहर में भवनों के लिए वाटर हार्वेस्टिंग के मानक लागू हैं मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दो साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने जल संचयन को लेकर खासी सक्रियता दिखाई थी और सरकारी भवनों व निजी भवनों के लिए लागू वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के मानकों का पालन कराने के निर्देश विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता को दिए थे। मगर इस ओर कोई काम नहीं हो सका।
डार्क जोन में आ चुके है जिले के कुछ क्षेत्र
हरदोई। जल निगम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गिरते जल स्तर को देखने के बाद जिले के तीन ब्लाक क्षेत्रों को डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। इनमें मल्लावां, माधौगंज व हरपालपुर ब्लाक के कुछ गांव हैं। इसके अलावा कई ब्लाकों के क्षेत्रों में जल स्तर गिर रहा है हालांकि इसके लिए अभी सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। जल संचयन को लेकर लोग यदि अब भी न चेते तो वह दिन दूर नहीं जब पेयजल का संकट खड़ा हो जाएगा। पेयजल संकट से बचने के लिए जल संचयन के साथ पानी की बर्बादी को रोकना होगा।
जल निगम के एक्सईएन एपी यादव ने बताया कि विभाग द्वारा लगाए जा रहे हैंडपंपों के दौरान पिछले वर्ष गिर रहे जल स्तर की पुष्टि हुई थी। 0.5 मीटर से दो मीटर तक तक जल स्तर खिसका था। भूगर्भ विभाग के सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद इस साल के जल स्तर गिरावट की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जल संचयन के प्रति विशेष रूप से जागरुकता लाने के लिए पिछले वर्ष गोष्ठी आदि आयोजित कराई गई। आम लोगों को भी जल संचयन के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। जल के अति दोहन एवं बर्बादी रोकने के उपाय के साथ जल संचयन करने से गिरते जल स्तर को रोकने में मदद मिलेगी। - रमेश मिश्रा, जिलाधिकारी