डीआरडीए के बाहर खुशी व्यक्त करते अधिकारी व कर्मचारी।
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एजेंसी के तौर पर कार्यरत जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के कर्मचारियों को 32 साल के संघर्ष का तोहफा मिला है। गुरुवार को कैबिनेट में हुई बैठक के बाद सरकार ने डीआरडीए कर्मियों को ग्राम्य विकास विभाग में समाहित करने पर मुहर लगा दी। सरकार की मंजूरी के बाद जिले में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया।
ग्राम्य विकास विभाग से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को पूरा कराने और उनकी देखरेख के लिए वर्ष 1984 में ग्राम्य विकास अभिकरण का गठन किया गया। जिसमें विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों की सीधी भर्ती की गई। डीआरडीए में कार्यरत कर्मचारी एजेंसी के कर्मी कहलाएं लेकिन शासन ने आश्वासन दिया कि डीआरडीए कर्मियों को किसी न किसी विभाग में समाहित कर दिया जाएगा। नई भर्ती पर रोक लगाते हुए सरकार ने प्रदेश के 16 जिलों के कर्मियों को विभागों में समाहित कर सरकारी कर्मचारी बना दिया था। जिला समेत अन्य तमाम जिलों में कार्यरत कर्मी एजेंसी की भांति ही काम कर रहे थे। ऐसे में गठन के कुछ वर्षों के बाद से ही कर्मियों ने संघर्ष शुरू कर दिया था। ग्राम्य विकास अभिकरण कर्मियों ने बताया कि अब उन लोगाें को नियमित वेतन और सुरक्षित सेवा मिलेगी । पुरानी पेंशन का लाभ मिलने की भी उम्मीद है।
इस दौरान सहायक अभियंता राजेश कुमार सिंह, मनोज कुमार शर्मा, भूपेंद्र सिंह, रीता मिश्रा, रामचंद्र दोहरे, प्रताप नारायन कनौजिया, राकेश वर्मा, गणेश त्रिवेदी, गिरीश चंद्र त्रिवेदी, रज्जन लाल व लाल चंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे।