राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में कृषि योग्य भूमि के घटते दायरे पर चिंता जताई गई। इस दौरान जुटे विद्वानों ने ‘ग्रामीण भारत के विकास में कृषि की भूमिका: 21वीं सदी में इसी संभावनाएं एवं चुनौतियां’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कृषि योग्य भूमि को दूसरे कामों में इस्तेमाल पर रोक की बात उठाई।
मुख्य अतिथि व बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सनातन नायक ने कहा कि कृषि व ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को पूरी तरह से असफल तो नहीं कहा जा सकता लेकिन अभी इस क्षेत्र में शोध एवं विकास पर अधिक कुछ किया जाना बाकी है। भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक डा. आरके पांडेय ने कहा कि जनसंख्या का दायरा बढ़ रहा है जबकि अन्न का उत्पादन बढ़ने के बजाय तेजी से घट रहा है। कृषि योग्य भूमि का दायरा सिमट रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का 83 प्रतिशत किसान जीवन निर्वाह के लिए ही खेती कर रहा है। 45 प्रतिशत ऐसे हैं जो कृषि को छोड़ना चाह रहे हैं। 45 प्रतिशत को ही हम पानी मुहैया करा पा रहे है यानी देश का 55 प्रतिशत किसान इंद्रदेव की मेहरबानी पर कृषि कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का ज्यादातर किसान विश्व व्यापार संगठन के बारे में ही नहीं जानते। जरूरत है कि किसानों में जागरूकता फैलाई जाए।
जनसंख्या के मुकाबले तेजी से उत्पादन बढ़ाने के प्रयास हों और कृषि योग्य भूमि का अनन्य क्षेत्रों में प्रयोग किया जाना बंद किया जाए। इससे पहले प्राचार्य डा. सुधीर कुमार चौहान ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए पिहानी व आसपास के क्षेत्रों में कृषकों की कृषि निर्भरता पर चर्चा की। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विवि में समाजशास्त्र विषय के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनीष वर्मा ने ग्रामीण विकास को रेडफील्ड के मैक्सिको के अध्ययन से जोड़कर समझाने का प्रयास किया। चार चरणों में आयोजित सेमिनार के प्रथम दिन विभिन्न शोधार्थियों ने अपने शोधपत्रों को भी अतिथियों के समक्ष रखा। इस दौरान प्रश्नोत्तर के माध्यम से भी कृषि व समस्याओं व समाधानों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों के साथ प्राचार्य सुधीर चौहान व दीप जलाकर किया। महाविद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। महासचिव डा. गगन कुमार तथा संयोजक डा. सुरेन्द्र कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान छात्राओं शिवानी गुप्ता, काजल देवी व नंदनी ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जीडीसी हरदोई के प्राचार्य डा. आरके मिश्रा, डा. मीना श्रीवास्तव जीडीसी पिहानी के प्रोफेसर एमसी यादव, डा. बृजलाल, प्रोफेसर विवेक तिवारी, प्रोफेसर मंगल किरण, प्रोफेसर विनोद त्यागी, प्रोफेसर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, डा. भैयालाल व आशीष सिंह समेत कालेज के विद्यार्थी व देश भर के अलग- अलग स्थानों के शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम का सफल संचालन सरिता सिंह ने किया। इस मौके पर सेमिनार की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।