हर वर्ष करोड़ों खर्च होने के बाद भी जिले के हजारों
बच्चों पर पड़ रही कुपोषण की छाया हट नहीं पा रही है। जिले में बच्चों के
पोषण को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चल रही योजनाएं जिम्मेदारों को
आईना दिखा रही है। विभागीय आंकड़ों की ही माने तो 1,16,651 बच्चों पर
कुपोषण और 8842 बच्चों पर अति कुपोषण की काली छाया पड़ी हुई है।
ऐसे में
डीएम ने सेरेलक बच्चों को मुहैया कराने को कंपनी को सेरेलक की कीमतों में
छूट देने की मांग की है। जिला प्रशासन विभागीय कामकाज को लेकर एवं
बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार को लेकर संतुष्ट नहीं है। जिले के सभी
3,930 आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाने को काफी प्रयास किए गए, पर अभी भी
आंगनबाड़ी स्तर के कर्मियों की मनमानी से बच्चों के लिए जाने वाले पोषाहार
के वितरण पर सवाल उठ रहे हैं।
केंद्रों पर साफ सफाई और नियमित ढंग से
पोषाहार का वितरण नहीं होता है। जिसको लेकर कई बार कार्रवाई भी हुई, पर
सुधार नहीं हुआ है। उधर, कुपोषित बच्चों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को पोषण
देने के बाबत शासन के निर्देश पर जिले में स्वास्थ्य पोषण दिवस के आयोजन
किए गए, जिसमें महिलाओं को बच्चों को स्वस्थ रखने के बाबत जानकारियां दी
गईं।
साथ ही गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर
सहित जांच कर आयरन की गोलियां व टीकाकरण भी कराया गया, पर यह सब हकीकत से
ज्यादा कागजी आंकड़ों में ज्यादा रहा। उधर, बच्चों में अतिकुपोषण व कुपोषण
को दूर करने को प्रदेश सरकार ने राज्य पोषण मिशन योजना को शुरू किया।
जिले
में डीएम और सीडीओ समेत 46 जिला स्तरीय अफसरों ने दो-दो गांवों को गोद लिया
है और अब अफसरों द्वारा पोषण संबंधी कार्यक्रमों को चलाया जा रहा है। उधर,
अतिकुपोषण की रोकथाम को जिला मुख्यालय पर पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बेडों
के वार्ड को तैयार शुरू किया गया।
बाल विकास विभाग द्वारा हर 14 दिन पर अति
कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। यहां दलिया, खिचड़ी तथा एफ-75
व एफ-100 स्तर का पोषाहार देकर उनको स्वस्थ बनाया जा रहा है। पोषण
पुनर्वास केंद्र का संचालन होने से अभी तक कुल 532 बच्चों को भर्ती कराया
गया है।
इसके आलावा जिला मुख्यालय पर पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन होने
के बाद अब संडीला व बिलग्राम में भी पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की
जाएगी। इस बाबत डीएम रमेश मिश्र ने सीएमओ को स्थापना कराने को प्रमुख सचिव
स्वास्थ्य को पत्र भेजने के निर्देश दिए, ताकि अधिक बच्चों को लाभान्वित
किया जा सके।