हरदोई। दिवाली पर रविवार को घरों से लेकर दुकानों तक में शुभ मुहूर्त पर ढोल ताशे बज उठे। मंत्रोच्चारण के बीच लोगों ने लक्ष्मी जी का पूजन पाठ किया गया। रोशनी से जगमग मंदिरों में भी पूजन पाठ की प्रक्रिया दिन भर चलती रही। इधर, बच्चों ने भी कहीं फुलझड़ी तो कहीं पटाखे फोड़ कर दीपमाला पर्व का स्वागत किया।
दिन भर बाजारों में रौनक रही तो घरों में भी लोग साज सज्जा में दिन भर जुटे रहे। कहीं-कहीं रंग रोगन का भी काम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने अपने-अपने तरीके से पूजन पाठ किया। अनुष्ठान के पूर्व दीवार पर ईश चिंह को बनाया गया। उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम चारों तरफ इसका प्रयोग किया गया। केसर, हल्दी या सिंदूर से इसको पूजन पाठ की जगह पर तैयार कर पूजन की थाली में कौड़ी को रख कर परंपरा का निर्वहन किया गया। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन का लाभ होता है। इसके साथ ही मंत्रोच्चारण के साथ गणेश लक्ष्मी का विधि विधान से पूजन कर घर को दियों से रोशन किया गया।
दिवाली पर घर को रोशन करने के लिए तरह-तरह की तैयारियां की गईं। बिजली की झालरों से घरों की सजावट की गई। इसके अतिरिक्त भी लोगों ने घर की सजावट कई ढंग से की। दीपावली के त्योहार पर घर के आंगन व चौखट में रंगोली बनाई गई। जिसे दीपों से सजाकर और भी अधिक मनभावन बना दिया।
दीपावली के त्योहार पर घर को सजाने में भी लोगों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। घरों को लोगों ने झालरों से सजाकर लुभावना बनाया और शाम को भी दीपों से सजाकर सुंदर बनाया। सबसे अधिक रंगोली की सजावटों ने लोगों को प्रभावित किया। दीपों से सजाई हुई रंगोली लोगों ने अपने घर की चौखट और आंगन पर बनाई। जिसमें उन्होंने दीयों को बड़े ही सुंदर ढंग से सजाई जो काफी अच्छी दिखीं।
सीएसएन प्रांगण में लगे पटाखा बाजार में सुबह से ही भीड़ लग गई। खुशियों को दोगुना करने के लिए बच्चे अपने पिता के साथ खरीद करते दिखाई दिए और रात होते ही आतिशबाजी के नजारे दिखने लगे। लोगों ने आतिशबाजी जलाकर त्योहारों की खुशियों को धूमधाम से मनाया।
दीपावली जैसे पर्व पर बड़े पैमाने पर आतिशबाजी की खरीददारी हुई। शहर में लखनऊ रोड स्थित सीएसएन कालेज में पटाखों की दुकानें लगाई गईं। जहां सुबह से ही लोगों की भीड़ खरीददारी करने के लिए उमड़ पड़ी। बच्चों ने आसमान में रंग बिरंगी रोशनी बिखेरने वाली आतिशबाजी खरीदी। वहीं नन्हें मुन्नों ने भी फुलझड़ी, अनार, मैहताब, चरखी आदि पटाखे खरीद कर दीपावली मनाई। वहीं शाम होते ही आसमान में आतिशबाजी के नजारे दिखाई देने लगे।