ओपीडी के बाहर फर्श पर बैठी महिलाएं।
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जिला महिला अस्पताल में जननी सुरक्षा योजना का मखौल उड़ाया जा रहा है। गर्भवती और प्रसूताओं से खून, पेशाब की जांच, अल्ट्रासाउंड और भर्ती करने के पैसे वसूले जा रहे हैं। नियमित चादरें तक नहीं बदली जातीं और मानक के अनुसार नाश्ता व खाना नहीं दिया जा रहा है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती और जच्चा-बच्चा को मुफ्त जांच और इलाज देने का नियम है। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती और प्रसूताओं से जांच के नाम पर पैसा लिया जा रहा है। बेड चार्ज और बख्शीश के नाम पर भी वसूली की जा रही है। धर्मशाला रोड निवासी मंजू वर्मा और लोनार क्षेत्र की राजकुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार तड़के करीब चार परिजन जिला महिला अस्पताल लाए थे। मंजू के तीमारदार राघवेंद्र प्रताप सिंह और राजकुमारी के पति हंसराज ने बताया कि भर्ती करते समय बेड चार्ज के नाम पर 40 रुपये और बख्शीश के नाम पर दो-दो सौ रुपये वसूले गए।
गर्भवती पूजा, ममता, यास्मीन सहित कई महिलाओं ने बुधवार को खून और पेशाब की जांच कराई थीं। इन महिलाओं का आरोप है कि जांच के एवज में 20-20 रुपये लिए गए। धरमपुरवा निवासी गर्भवती अंजू खून की जांच और अल्ट्रासाउंड कराने आई थी। पर्चा बनवाकर खून की जांच के लिए नौ बजे लाइन में लग गई थी लेकिन 12 बजे तक जांच नहीं की गई। पूजा का आरोप है कि उसने 20 रुपये जमा नहीं किए थे, इसलिए जांच नहीं की गई। प्रसूताओं के परिजनों ने बताया कि दवाइयां और इंजेक्शन भी बाहर से मंगाए जाते हैं। बेड की चादरें भी नियमित नहीं बदली जाती हैं।