रेलगाड़ियों में विकलांगों को अब रियायती सफर करने को
मशक्कत करनी पड़ेगी। विकलांग प्रमाण पत्र के साथ रियायती टिकट लेकर
फर्जीवाड़ा करने वालों पर लगाम लगाने को उत्तर रेलवे ने नया नियम लागू कर
दिया है। ट्रेनों में विकलांगता पर रियायती टिकट पाने को अब व्यक्ति को
अपना चिकित्सीय परीक्षण कराने के लिए मुरादाबाद जाना होगा। जहां विकलांगता
के आधार पर कार्ड जारी होने के बाद ही रियायती टिकट मिल सकेगा।
विकलांगों
को ट्रेन में सफर करने को रियायती दरों पर टिकट देने के साथ ही उनके लिए
अलग से डिब्बा भी होता है। रेलवे में यह सुविधा तो विकलांगों को दी है, पर
अब इसका दुरुपयोग होने लगा है। विकलांगों के डिब्बे में तो सामान्य व्यक्ति
बैठ ही जाता है, फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र जारी करवाकर रियायती दरों पर
टिकट भी ले लेता है।
ट्रेनों में विकलांग प्रमाण पत्र पर हो रहे फर्जीवाड़े
से जहां एक ओर विभाग को चूना लग रहा, वहीं दूसरी ओर जो वास्तव में विकलांग
हैं, उनको लाभ नहीं मिल पा रहा है। विकलांग प्रमाण पत्र पर हो रहे
फर्जीवाड़े को लेकर ही अब रेलवे ने ठोस कदम उठाते हुए विकलांगों का परीक्षण
कर उनको एक कार्ड जारी करने का नियम लागू कर दिया।
बताया गया कि जिला
अस्पताल से जारी होने वाले प्रमाण पत्र के अलावा अब विकलांगों को उत्तर
रेलवे की ओर से जारी किया गया कार्ड भी दिखाना होगा। मुख्य आरक्षण
पर्यवेक्षक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि विकलांग कार्ड के लिए विकलांगों को
मुरादाबाद जाकर रेलवे के डाक्टर से चिकित्सीय परीक्षण कराना होगा। जिसके
बाद ही उन्हें कार्ड मिलेगा और उसको दिखाने के बाद ही रियायती दर से टिकट
बन सकेगा।
मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक ने बताया कि उत्तर रेलवे ने इस बाबत
पांच जनवरी को ही सरकुलर जारी कर दिया था और अब यह आदेश स्थानीय रेलवे
स्टेशन पर आ गया। जिसके बाद से बिना कार्ड के किसी का भी रियायती टिकट नहीं
बनाया जा रहा है।
उधर, उत्तर रेलवे ने मुरादाबाद स्टेशन पर विकलांगों
का कार्ड बनाने को सभी कार्य दिवस में दिन निर्धारित कर दिए हैं। बताया गया
कि रेलवे कैलेंडर के अनुसार शनिवार व रविवार को अवकाश रहेगा, पर अन्य
कार्य दिवस में कोई भी विकलांग जाकर अपना चिकित्सीय परीक्षण करवा कार्ड
बनवा सकता है।