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यज्ञ पूरा करने निकले राम-लक्ष्मण

Fri, 30 Jan 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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नुमाइश मैदान में चल रही श्रीरामलीला मंचन कार्यक्रम में प्रस्तुति दे रहे गोविंद गोपाल लीला संस्थान वृंदावन धाम के कलाकारों ने गुरुवार को विश्वामित्र का अयोध्या आगमन एवं राम लक्ष्मण का उनके साथ राक्षसों का वध करने को प्रस्थान करने का भाव पूर्ण मंचन किया।
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वहीं राक्षसों के वध की लीला का भी वास्तविक मंचन कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। रामलीला के मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि ऋषि विश्वामित्र अयोध्या आते हैं और महाराज दशरथ को राक्षसों के उपद्रव की जानकारी देते हुए यज्ञ पूर्ण कराने को राम-लक्ष्मण को साथ में भेजने का आग्रह करते हैं।

दशरथ बेहद भारी मन के साथ दोनो भाइयों को मुनिवर के साथ भेजते हुए कहते हैं कि रखना धरोहर मेरी मुनिवर संभाल के देता हूं दोनों नैना अपने निकाल के और मुनिवर उन्हें लेकर चल देते हैं। वन जाने के दौरान ताड़का राक्षसी आती है, जिसका श्रीराम एक ही बाण में वध कर देते हैं और प्रात: के समय मुनि से कहते है कि आप निर्भय होकर यज्ञ करिए, अब यहां कोई राक्षस आप के यज्ञ में बाधा नहीं डाल पाएगा।
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मुनि यज्ञ शुरू करते हैं तो मारीच अपनी सेना के साथ हमला करते हैं। दोनों भाई मारीच को बाण मार समुद्र के पार लंका पहुंचा देते तथा सुबाहु आदि सेना को भस्म कर देते हैं। मुनि विश्वामित्र को जनक पुर से महाराजा विदेयराज का सेवक आमंत्रण पत्र लेकर आता है।

जहां महाराज विदेय राज ने सीता स्वयंवर को उन्हें आमंत्रित किया जाता है। जनकपुरी जाने के दौरान मार्ग में नारी की आकृति के पत्थर को देखकर श्रीराम उनके बारे में पूछते हैं तो विश्वामित्र अहिल्याबाई की कथा सुनाते हैं और दोबारा नारी रूप में आने का उपाय बताते हैं।

श्रीराम अपने पैरों की धूल से पत्थर को दोबारा नारी बना देते हैं। कलाकारों ने सभी लीला का मंचन भावपूर्ण ढंग से किया। इस मौके पर आयोजक राम प्रकाश शुक्ला, कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, राकेश गुप्ता, संत कुमार सिंह व प्रेम शंकर द्विवेदी आदि मौजूद थे।
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