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Hardoi News: डिजिटल एक्सरे मशीन का खराब हुआ ड्रैग कंट्रोल बोर्ड, मरीजों की बढ़ी दुश्वारियां

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फोटो-05- मेडिकल कॉलेज में पोर्टेबल मशीन से एक्स-रे करती टेक्नीशियन। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डिजिटल एक्सरे मशीन एक बार फिर खराब हो गई है। मुख्य मशीन खराब होने से मरीजों का एक्सरे पोर्टेबल मशीन से किया जा रहा है। इससे मरीजों को एक्सरे करवा पाना दुश्वारियों भरा होता जा रहा है। एक तो उमस भरी गर्मी उस पर एक्सरे कराने में पूरा दिन निकल जा रहा है। पोर्टेबल मशीन से अधिक एक्सरे न होने की वजह से तमाम मरीजों को बिना जांच के ही लौटना पड़ रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें हड्डी रोग से संबंधित मरीजों के अलावा दुर्घटनाओं में शिकार मरीज भी आते हैं। इन मरीजों को उपचार से पहले डॉक्टर एक्सरे कराने की सलाह देते हैं। वैसे तो मरीजों का एक्सरे अभी तक डिजिटल एक्सरे मशीन से हो रहा था। इसमें एक्सरे होने में अधिक समय नहीं लगता है और जांच रिपोर्ट भी बेहतर आती है।
वहीं अब एक बार फिर से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब हो गई है। जानकारों के मुताबिक डिजिटल मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड खराब हो गया है। यह बोर्ड मशीन को बिजली की सप्लाई को कंट्रोल करता है और मशीन के ऑपरेटिंग में सहायता करता है। बुधवार को यह बोर्ड खराब होने से बीते दो दिनों से पोर्टेबल मशीन से एक्सरे किए जा रहे हैं जिसमें एक बार में अधिकतम 65 से 70 एक्सरे ही हो पाते हैं जबकि डिजिटल मशीन से रोजाना 150 से 200 या कभी उससे भी अधिक मरीजों के 300 से 350 एक्सरे किए जाते थे। ऐसे में अतिरिक्त लोड पड़ते ही मशीन कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ती है।
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एक्सरे कराने में बीत रहा पूरा दिन
मेडिकल कॉलेज में दूर-दराज से तमाम मरीज एक्सरे जांच कराने पहुंचते हैं। चूंकि एक्सीडेंट और आईपीडी वार्ड में भर्ती मरीजों के एक्सरे कराने में प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों को इन दिनों लंबा इंतजार करना पड़ जाता है। बता दें कि कई बार सुबह 10 बजे मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीज का नंबर दोपहर दो बजे के बाद आ पाता है। इस दौरान ओपीडी का समय पूरा होने की वजह से मरीज को जांच लेकर डॉक्टर को दिखाने के दिए दूसरे दिन आना पड़ता है।


रिपोर्ट भी लेनी पड़ती मोबाइल पर
डिजिटल एक्सरे मशीन बंद होने से अब पोर्टेबल मशीन से एक्सरे होते हैं जिसमें समय लगने से कई बार मरीजों को बिना जांच के ही लौटना पड़ जाता है या फिर निजी सेंटर पर जांच करानी पड़ती है। वहीं पोर्टेबल मशीन से एक्सरे कराने पर मरीजों को जांच रिपोर्ट भी नहीं मिलती। मरीजों को अपने मोबाइल से एक्सरे की फोटो खींचनी पड़ती है।


डिजिटल मशीन को सही कराने के निर्देश कार्यदायी संस्था सायरिक्स को दे दिए गए हैं। जानकारी मिली है कि उपकरण आ गया है जल्द ही मशीन सही होकर फिर काम करने के लायक हो जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो-05- मेडिकल कॉलेज में पोर्टेबल मशीन से एक्स-रे करती टेक्नीशियन। संवाद

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