रबी विपणन वर्ष 2020-21 के तहत जिले में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो जाएगी। खरीद पारदर्शी ढंग से की जा सके और बिचौलियों के प्रभाव पर अंकुश लगे
, इसके लिए शासन ने पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव किया है। किसानों को अब पंजीकरण के साथ ही कुल रकबे व बोई गई फसल का ब्यौरा अंकित करना होगा। इससे उपज की बिक्री के समय पंजीकरण के आधार पर उपज की खरीद की जा सके।
धान और गेहूं की सरकारी खरीद लंबे समय से बिचौलियों के काकश में उलझी है। पिछले कुछ वर्षों में व्यवस्था में निरंतर सुधार किया गया है, लेकिन अब भी धान और गेहूं की सरकारी खरीद पूरी तरह से बिचौलिया मुक्त नहीं हो सकी है।
लगातार शिकायत मिलने के बाद शासन ने इस बार गेहूं खरीद से पहले व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए किसान पंजीकरण व्यवस्था में कई बदलाव किए हैं।
नए नियमों के मुताबिक अब किसानों को पंजीकरण के वक्त अपना वास्तविक मोबाइल नंबर देना होगा, नंबर पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आएगा। पासवर्ड सबमिट करने के बाद ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण हो सकेगी।
इसके साथ ही इस बार किसानों को खतौनी में दर्ज वास्तविक रकबा के साथ ही यह भी अंकित करना होगा कि कुल रकबे के कितने हिस्से में कृषक द्वारा कौन सी फसल बोई गई है।
अगर खाता नंबर शामिलात है, तो पंजीकरण कराने वाले किसान को उसमें अपने अंश का उल्लेख करना होगा। इससे शासन ने गड़बड़ी रोकने को इस बार चकबंदी प्रक्रिया संबंधित गांव के किसानों के शतिप्रतिशत पंजीकरण डाटा का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। शासन की ओर से पूर्व में लागू की गई 100 क्विंटल से अधिक उपज के सत्यापन की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी।