फोटो-06- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लगी ऑक्सीजन लाइन। संवाद
फोटो-07- इमरजेंसी वार्ड में महिला को कंसंट्रेटर से दी जा रही ऑक्सीजन। संवाद
फोटो-08- इमरजेंसी वार्ड में रखे आक्सीजन के सिलेंडर। संवाद
फोटो-09- मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा आक्सीजन प्लांट। संवाद
- मेडिकल कॉलेज में वार्डों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइप लाइन व उपकरण बने शोपीस
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को अभी कन्संट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। ऑक्सीजन प्लांट लगे होने के बावजूद इमरजेंसी में आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। प्लांटों से गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन का उत्पाद न होने की वजह से सिलिंडरों पर प्रतिदिन हजारों रुपये भी खर्च हो रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता से ऑक्सीजन प्लांट शोपीस बने हुए हैं।
कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की मांग बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज में पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए वार्ड में बेडों तक पाइप लाइन डालकर आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए उपकरण भी लगाए गए। लाखों रुपये खर्च बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट अब सिर्फ शोपीस बने हुए हैं।
प्लांटों से गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन का उत्पाद न होने से इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को कंसंट्रेटर और सिलिंडरों के भरोसे रहना पड़ रहा है। वार्ड में छह कंसंट्रेटर और आठ ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। सिलिंडरों को भरवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये भी खर्च किए जा रहे हैं।
केस-1- कंडौना गांव निवासी रेशमा की रविवार को अचानक तबीयत खराब होने से उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। भर्ती करने के बाद सांस लेने में दिक्कत बढ़ी तो कन्संट्रेटर लगाया गया। उस दिन से कन्संट्रेटर की मदद से ही रेशमा को ऑक्सीजन दी जा रही है।
केस-2- कासिमपुर के भटौली निवासी रामू को शुक्रवार को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है। उन्हें शुक्रवार शाम से ही कंसंट्रेटर की मदद से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।
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गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन का उत्पादन भी नहीं हो रहा
ऑक्सीजन प्लांट पर भले ही लाखोंं रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन प्लांट से गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन का उत्पादन ही नहीं हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के द्वार के पास लगे प्लांट से इमरजेंसी को ऑक्सीजन की सप्लाई होनी है। दो बार उत्पादन भी किया गया लेकिन दोनों बार ऑक्सीजन की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं रही। इस वजह से प्लांट बंद कर दिया गया। हालांकि ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया जा चुका है। बीते शनिवार को भी इंजीनियरोंं ने निरीक्षण कर प्लांट के अंदर कुछ उपकरणों को बदलने की बात कही है।
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डीएम के निर्देशों के बाद भी नहीं दे रहे ध्यान
हरदोई। करीब चार माह पहले जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने नाराजगी व्यक्त की चार दिन में प्लांट संचालित कर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन चार दिन के स्थान पर चार माह बीत गए, लेकिन अभी तक प्लांटों से ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई है। जिम्मेदारों की उदासीनता के लाखों खर्च होने के बाद भी व्यवस्थाएं जस की तस हैं।
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ऑक्सीजन प्लांट से आपूर्ति गुणवत्ता पूर्ण न होने की वजह से मरीजों की सहूलियत के लिए कन्संट्रेटर और सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में है। सिलिंडर खाली होने पर प्रतिदिन उन्हें भरवा दिया जाता है। डाॅ. अमित आनंद, इमरजेंसी प्रभारी
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शासन स्तर से कार्यदायी संस्था नामित की जा चुकी है और पिछले सप्ताह उन्होंंने आकर निरीक्षण भी किया है। इंजीनियरों के अनुसार उपकरणाें को बदला जाना है। कार्य पूरा होते ही ऑक्सीजन आपूर्ति होने लगेगी।-डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
शाहजहांपुर रोड पर कोहरे में जाते वाहन। - फोटो : शाहजहांपुर रोड पर कोहरे में जाते वाहन।