युग पुरुष स्वामी विवेकानंद की पावन 152 वीं जयंती पर सोमवार को जिले भर में कार्यक्रमों की धूम रही। कहीं घर घर में धर्मदीप जलाने का संकल्प लिया तो कहीं वेदांत मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कई संगठनों ने गांवों में समरसता का भाव जागृत करने के लिए गांवों को गोद लेने की बात कही।
आर्य कन्या महाविद्यालय में विचार गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्या डा. निर्मला यादव ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। डा. आशा मिश्रा व डा. रानी भटनागर ने छात्राओं को स्वामीजी के आदर्शों को जीवन में उतारने की शिक्षा दी। अर्चना जिंदल, डा. मीरा रानी रावत, डा. उमारानी सक्सेना, साधना शुक्ला, राजेश कश् मौजूद रहे।
अनुभूति संस्था की गोष्ठी में अध्यक्ष डा. ईश्वर चंद्र वर्मा ने बताया कि वे प्रबुद्ध विचारक, संन्यासी एवं निष्काम कर्मयोगी थे। जिन्होंने 39 वर्ष के अपने अल्प जीवन में ही विश्व को और विशेष रूप से युवाआें को एक नई दिशा दी।
रोवर रेजर्स प्रभारी डा. किरन यादव ने कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बाद भी स्वामी जी ने विश्व पटल पर भारतीय दर्शन, वेद एवं स्नातन धर्म को स्थापित किया। डा. मीना श्रीवास्तव ने कहा कि स्वामी जी ने जीवन दर्शन के तीन स्तंभ बताए हैं।
इसी क्रम में सरस्वती शिशु मंदिर व विद्या मंदिर विष्णुपुरी में सभी से स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने का आह्वान किया गया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री योगेश ने कहा कि सभी जुटकर समाज की मलिनता को दूर करने का प्रयास करें। इस मौके पर प्रधानाचार्य विनेाद कुमार श्रीवास्तव, अंबा लाल वर्मा मौजूद रहा।
डा. राम मनोहर लोहिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय अल्लीपुर के बीएड विभाग द्वारा स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस सामरोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डा. राकेश चंद्र त्रिवेदी ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में स्वामी जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।