हरदोई। शहर को बिजली सप्लाई देने के लिए दो दशक पहले लगाए गए लोहे के खंभे जिंदगी के लिए खतरा बन गए हैं। चौराहों, मुख्य सड़कों और गलियों में जर्जर हो चुके सैकड़ों खंभे तारों के सहारे झुके खड़े हैं। तेज हवा और आंधी चलने पर हादसे की आशंका और बढ़ जाती है। शहर के करीब सवा लाख लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं और जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शहर की बिजली आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए करीब 20 साल पहले राजीव गांधी शहरी विद्युतीकरण योजना से लोहे के 5595 खंभे लगाकर नए तार बिछाए गए थे। इन खंभों पर कहीं एलटी तो कहीं एचटी लाइन दौड़ रही है। अब कई हजार खंभे नीचे से गल गए हैं। लोहे के खंभों में करीब एक तिहाई जंग खाकर नीचे से गल चुके हैं। जर्जर खंभे कई जगह कई झुक गए हैं तो कई जगह केवल तारों के सहारे टिके हैं। शहर की व्यस्ततम सड़कों और चौराहों पर भी जर्जर खंभे झुकी हालत में हैं। तेज हवा और आंधी आने पर खंभे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार खंभे गिरने से हादसे भी हो चुके हैं। कुछ खस्ताहाल खंभों में नीचे एंगल लगाकर वेल्डिंग जरूर करा दी गई है।
प्रमुख चौराहों व मार्गों पर लगे जर्जर खंभे
अति व्यस्ततम सिनेमा रोड स्थित पोल टूटकर आधा लटका हुआ है। इसके अलावा घंटाघर रोड पर भी पोल एक ओर झुक गया है। सरकुलर रोड पर भी चौराहे के निकट पोल गिरने के कगार पर है। लखनऊ चुंगी पर भी पोल गिरने की स्थिति में है।
सामग्री का अभाव लटका रहा प्रस्ताव
करीब तीन वर्ष पहले विभाग ने सैकड़ों जर्जर खंभों में नीचे वेल्डिंग करा दी थी, इसके बावजूद खतरा टला नहीं है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन्हें खंभों के जर्जर होने की जानकारी है। कुछ खंभों को बदलने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन सामग्री ही नहीं मिली। इसके बाद अधिकारी चुप बैठ गए।
वर्जन
विभाग का पूरा काम ठेकेदारों से कराया जाता है। शहर में खंभों की मरम्मत और बदलने का काम भी ठेकेदार ही कराते हैं। ठेकेदार मनमानी से काम करते हैं। विभाग नए खंभे लगाने का प्रस्ताव देता है लेकिन ठेकेदार खंभे वेल्डिंग करा देते हैं। - दिलीप यादव, उपखंड अधिकारी शहर