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आशा बहुओं ने बढ़ाए संस्थागत प्रसव

Wed, 01 Jul 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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जननी सुरक्षा योजना में अहम भूमिका निभाने वाली आशा बहुओं विभागीय उपेक्षा का शिकार है। उनको मानदेय व भत्ता के लिए अफसरों की चिरौरी करनी पड़ती है, जबकि उनके सहयोग के कारण ही जिले में संस्थागत प्रसव की संख्या में बढ़ोतरी हो रही, पर उनकी व्यथा की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं को समुदाय तक पहुंचाने के लिए जिले में वर्ष 05 में आशा योजना शुरू की गई थी। इसके तहत जिले में 1000 से 1499 तक की ग्रामीण आबादी पर एक आशा बहू की तैनाती की गई थी। जिले में 3,550 आशा बहुओं के पद स्वीकृत हैं। जिसके सापेक्ष 2677 आशा बहुएं कार्यरत हैं।

इन आश बहुओं के सहयोग से विभाग संस्थागत प्रसव का लगातार लक्ष्य प्राप्त कर रहा है। जननी सुरक्षा योजना में इनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद इनको मानदेय व भत्ता पाने के लिए अधिकारियों की चिरौरी करनी पड़ती है।
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उनका स्वास्थ्य केंद्रों पर आर्थिक दोहन किया जाता है। साथ ही मानदेय के लिए कई कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कई बार इस बाबत विभागीय जिम्मेदारों का विरोध प्रदर्शन कर ध्यान आकर्षित कराया, पर अभी भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

ज्ञात हो कि आशा बहुओं को प्रोत्साहन राशि दो चरणों में दी जाती है। पहले तीन सौ रुपये और फिर तीन सौ रुपये दिए जाते हैं, जिसमें उसको प्रसूता व बच्चों के टीकाकरण के विषय में जानकारी देनी होती है। प्रोत्साहन राशि एक साथ दी जाती है। इससे उसकी धनराशि बढ़ जाती है।

जिसको निर्गत करने को विभागीय कर्मी उनका आर्थिक दोहन करते हैं। बगैर उसके उनको प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती है। उधर, विभागीय आंकड़ों की माने तो आशा-बहुओं के माध्यम से ही सभी संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 54,914 प्रसव आशा बहुओं के माध्यम से कराए गए।
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इनमें 54,904 संस्थागत प्रसव व 10 घरेलू प्रसव शामिल हैं। जिसके लिए उनको 623.75 लाख रुपये का लाभ दिया जा चुका है।
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