पीड़ितों की समस्याओं के निस्तारण का दावा करने वाले
अफसरोें का कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे सेवानिवृत्त टीचरों की मांगों
पर ध्यान नहीं जा रहा, जिससे इन सेवानिवृत्त टीचरों में खासा रोष पनप रहा।
उन्होंने अपनी समस्याओं के लिए विभागीय वित्त एवं लेखाधिकारी की कार्यशैली
पर सवालिया निशान लगाते हुए मांगों के जल्द निस्तारण की मांग की।
कलक्ट्रेट
परिसर में गुरुवार को दूसरे दिन भी देयकों की मांग को लेकर कल्याण परिषद
के बैनर तले सेवानिवृत्त टीचर धरने पर बैठे रहे। उन्होंने कहा कि जब तक
मांगें पूरी नहीं होती धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। संघ के अध्यक्ष रामविलास
सिंह कुशवाहा ने कहा कि सेवानिवृत्त टीचरों का जमा फंड पर ब्याज मार्च तक
दिया गया है, जबकि शासनादेश 30 जून तक ब्याज देने का है।
फरवरी से जून तक
मध्य मिलने वाली वेतन वृद्धि को वेतन में शामिल कर अंतिम आहरण के 50
प्रतिशत पेंशन निर्धारित किया जाए। इसका शासनादेश एक मई 12 को हो गया था,
पर विभाग ने यह कहकर टाल दिया था कि शासनादेश आने पर तुरंत दे दिया जाएगा। अध्यक्ष
ने कहा कि वर्ष 07 से 09 तक के सेवानिवृत्त टीचरों को 10 महीने के औसत से
पेंशन दी जा रही, जबकि 28 फरवरी 11 को शासनादेश हुआ कि वेतन के अंतिम आहरण
के 50 प्रतिशत पर पेंशन का निर्धारण किया जाए।
महामंत्री यदुनाथ प्रसाद
वर्मा ने कहा कि नगर क्षेत्र के 16 सेवानिवृत्त टीचरों का पांच प्रतिशत डीए
अवशेष बकाया है, जो नहीं दिया जा रहा है, जबकि सभी पेंशनरों को उक्त डीए
का लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 14 से सेवानिवृत्त
टीचरों के जमा फंड कम मिला है, जांच कराकर जो सही हो उसे दिलाया जाए।
उन्होंने कहा कि धरना प्रदर्शन अनिश्चित समय तक जारी रहेगा। इस मौके पर
बालकराम गुप्ता, श्यामा चरण शुक्ल, मोहन लाल दीक्षित, वीरपाल सिंह, दुलारे
लाल व नत्थू लाल आदि मौजूद थे।