विद्युत की बेहतर व्यवस्था को शहर से लेकर गांव तक
हाईटेंशन लाइनों का जाल बिछा दिया गया। शहर के विस्तार में लोगों को जहां
जगह मिली वहां आशियाने बन गए। आशियाने बनाने के दौरान लोगों ने यह भी नहीं
सोचा कि उन पर हर वक्त मौत का साया मंडरा रहा है।
जरा सी चूक उनके हंसते
खेलते घर को बरबाद करने के लिए काफी है। तमाम ऐसे मोहल्ले हैं, जहां के
सैकड़ों परिवार हाईटेंशन लाइनों के नीचे बसे हुए हैं और वह परिवार रोज मौत
दो-दो हाथ कर रहे हैं। इतना ही नहीं आपूर्ति की मांग को पूरा करने को
जगह-जगह विद्युत ट्रांसफार्मर भी लगा दिए गए।
उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत
व्यवस्था का लाभ तो मिला, पर दिनों दिन विस्तार से अब जिंदगियां मौत के
मुहाने तक आ गई। मकान बनाने की होड़ में लोगों ने अपने सिर पर मंडराती मौत
से भी लोहा ले लिया। आजाद नगर, सुभाष नगर, राम नगरिया व कृष्ण
नगरिया आदि के कई घरों की छत से 11 हजार वोल्ट का करंट
दौड़ रहा है।
जिनसे कई हादसे हो भी चुके हैं, पर बिजली विभाग कोई कदम नहीं
उठा रहा है। जिसका खामियाजा निर्दोषों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि,
इसमें कहीं न कहीं दोषी आम जनमानस व उपभोक्ता है, लेकिन विद्युत विभाग भी
जिम्मेदार है।
बहरहाल तमाम हादसों की आशंकाओं के बावजूद विभाग की ओर से
कार्रवाई नहीं जा रही है। उधर, शहर में तमाम ऐसे मोहल्ले हैं, जो अब
हाईटेंशन लाइनों के नीचे बस गए हैं। जहां के बाशिंदे आए दिन मौत से दो-दो
हाथ करते हैं। आजाद नगर, सुभाष नगर, राम नगरिया व कृष्ण नगरिया, टिलिया
पुरवा सहित कई मोहल्लों में घरों की छत से 11 हजार वोल्ट का जानलेवा करंट
हर वक्त दौड़ता रहता है।
एचटी लाइनें से कई हादसे हो भी चुके हैं। जिसके
पीछे प्रशासन भी बड़ा जिम्मेदार है। हाईटेंशन लाइन के नीचे के प्लाटों को
अवैध ढंग से बेचा गया। वहीं मकान बनने के बाद अब विभाग ने भी तार नहीं
हटाए, जिसका खामियाजा निर्दोषों को भुगतना पड़ रहा है।
उधर, अब इसमें तो
विभाग की लापरवाही तो नहीं कहेंगे, बल्कि यह कहना सही होगा कि लोगों को
अपनी जान की खुद ही परवाह नहीं है। हाईटेेंशन लाइनें बिछाने से पूर्व तो
कोई बस्ती नहीं थी, पर जब बस्ती बनी तो लोगाें ने अपनी जमीन के चक्कर में
बिजली के हाईटेंशन के खंभों को ही अपने घर में शामिल कर लिया।
उक्त
मोहल्लों में तमाम स्थानों पर ऐसा नजारा देखने को मिल जाता है, जहां
विद्युत पोल के अब घरों में शामिल है। ऐसे में किसी हादसे से इंकार आखिर
किया जाए तो कैसे। जिनकी चपेट में आ जाए तो उनकी मौत निश्चित है।
हादसे कई
बार हुए हैं और दिन रात हर समय हादसों का डर रहता है, पर फिर लाइनों को
हटाने की ओर से कोई
प्रयास नहीं हुआ है और न ही भविष्य में संभव लग रहा है।
उपभोक्ता भी इस ओर लापरवाह बने हुए हैं।