कुदरत की मार से बेहाल किसानों को शासन से मिलने वाली
इमदाद के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। आलम यह है कि तहसील क्षेत्र के
करीब 40 हजार किसानोें को अभी तक दैवी आपदा चेक नहीं मिल सकी है। वहीं जिन
किसानों को चेक मिली भी है, वह उसके भुगतान के लिए संबंधित बैंक में भुगतान
के लिए चक्कर काट रहे हैं।
हैरत की बात है कि किसानों की इस पीड़ा को न
तो जिम्मेदार अफसर महसूस कर रहे न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि। ऐसे में अब
खरीफ की फसल के लिए किसान साहूकारों से कर्जा लेने को विवश हो रहा है।
ज्ञात हो कि गत वर्ष सूखे की मार फिर रवी की फसल में बारिश और ओलावृष्टि ने
किसानों के सपनों को तोड़ दिया था।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने
नुकसान के आकलन का सर्वे कराया, जिसमें करीब 550 गांव में 55,254 किसानों
की फसल बर्बाद हुई थी। इनके मुआवजा के लिए तहसील प्रशासन ने 23 करोड़ की
डिमांड की थी, जिसके सापेक्ष अभी तक दैवी आपदा मद में 6.70 करोड़ रुपये की
धनराशि आवंटित हुई, जिसमें छोटे किसानों को 1500-1500 रुपये की चेकें
वितरित कराई गईं।
तहसील प्रशासन का दावा है कि मिले बजट में 18,055
किसानों को चेकें वितरित क र दी गई हैं, पर हकीकत यह है कि अभी तक करीब
1,5000 किसानों को चेकें वितरित की गईं हैं। शेष करीब 3,055 चेकाें का
वितरण लेखपाल के स्तर से धीमी गति से हो रहा है। जिसका खामियाजा किसान भुगत
रहे हैं।
जिन किसानों को चेक आवंटित हुई उन्हें भी भुगतान के लिए संबंधित
एसबीआई की शाखा में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब
40 हजार किसान अभी भी दैवी आपदा की चेक के लिए इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं।