जिले में बेटियों की स्थिति बेहतर नहीं है। एक तरफ
कन्या भ्रूण हत्या बढ़ती नजर आ रही है तो दूसरी तरफ उनका आर्थिक एवं
सामाजिक दायरा भी प्रभावित है। पुत्र की चाह व संतानों की संख्या सीमित
रखने की कवायद मेें ममता का सागर अब शायद सूखता जा रहा है। डॉक्टरों की
मानें तो गर्भपात के बाद मां के पेट में बचे मांस के लोथड़े गर्भनिरोधक का
काम करते हैं। इसके चलते गर्भधारण की गुंजाइश भविष्य में भी कम रह जाती है।
महिला
रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बांझपन के कई मामलों में जांच के दौरान
गर्भाशय में भ्रूण के अवशेष पाए गए। इनकी उपस्थिति निश्चित रूप से एक गर्भ
निरोधक की तरह कार्य करती है। पर, जब गर्भाशय की हिस्ट्रोस्कोपिक विधि से
सर्जरी कर भ्रूण अवशेषों को हटाया गया तो महिलाओं ने आसानी से गर्भधारण कर
लिया।
डा. अंजू गुप्ता आदि का कहना है कि जिस देश में कन्या को देवी
स्वरूपा मानकर उनकी पूजा की जाती है और वहीं ही उनको जन्म से पहले ही मार
दिया जाए तो इससे बड़ा पाप कोई है नही, पर यही पर सब कुछ खत्म नहीं होता।
कन्या के भ्रूण की हत्या कोख में ही कराने वाले अभिभावक यह अच्छी तरह जान
ले इसका असर उनकी कोख पर कही न कहीं अवश्य पड़ता है।
लापरवाही उनको हमेशा
के लिए मां के सुख से भी वंचित कर सकती है। इसके अलावा जिले में बेटियों क ो
उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। गरीबी व आर्थिक तंगी में कोई लकड़ी
बेंचकर व दूसरों के घरों में बर्तन धोकर अपना भविष्य तलाशती नजर आती हैं।
इसी तरह दहेज लोभ भी बेटियों की हत्या का अहम कारण है।
अब तो जिले में एक
हजार पुरुषों पर 868 बालिकाओं को देखकर जिले के आला अधिकारी भी चौंकने लगे
हैं। फिलहाल दबी जुबान से ही, पर अफसरों द्वारा अब यह कबूल किया जाने लगा
है कि अल्ट्रासाउंड से जान बेटियों की जन्म से पहले ही कोख में हत्या कर दी
जा रही है।
फिलहाल जागरूकता बढ़ने के बाद से इस पर अंकुश लगाया गया है।
जिले की बीते दस वर्ष में आबादी सात लाख 33 हजार 380 बढ़कर 40 लाख के ऊपर
पहुंच चुकी है। इसके बावजूद भी लोगों का मोह लड़कों से छूट नहीं पा रहा
और इस जिले की बेटियों की संख्या प्रदेश के 71 जिलों में नीचे से दूसरे
स्थान पर है।
वर्ष 11 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 40,91,380 है।
जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 22,04264 है, वहीं महिलाओं की संख्या 18,87,116
ही है। महिलाओं की संख्या अभी भी कम है। जिले में 1000 लड़कों पर केवल 868
लड़कियां ही हैं। जिले की आबादी में 0-6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या भी
छह लाख से अधिक हो गई है।
हरदोई जिले में 6,62,807 बच्चे 0-6 वर्ष आयु वर्ग
के हैं। जिसमें भी लड़कियों की संख्या प्रति एक हजार बच्चों से काफी कम
है। जिले में 1000 बच्चों पर 868 लड़कियां हैं। वैसे तो देखा जाए तो जिले
की संडीला तहसील 0-6 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों में सबसे अधिक है।
संडीला तहसील में 1,74,358 हैं, जिसमें लड़कों की संख्या 99,032 व लड़कियां
75,326 है। वहीं इससे कम हरदोई तहसील है, जिसमें लड़कों की संख्या
1,54,399 हैं, जिसमें लड़के 80986 हैं, वहीं लड़कियां 73,413 हैं, जबकि 0-6
आयु वर्ग में सबसे कम बच्चे सवायजपुर क्षेत्र में 75294 हैं।
जिसमें लड़के
39,913 तथा लड़कियां 35,381 हैं। शाहाबाद की 1,05,962 जनसंख्या है, जिसमें
लड़के 55,711 और लड़कियां 50,217 और बिलग्राम की जनसंख्या 83,861 है,
जिसमें लड़के 43,829 तथा लड़कियां 40,032 हैं।