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Hardoi News: सालों बाद शुरू हुए ट्रॉमा सेंटर में नहीं पहुंच रहे गंभीर मरीज, सर्दी खांसी का हो रहा इलाज

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हरदोई। सड़क हादसे या अन्य किसी दुर्घटना में घायल मरीजों को इमरजेंसी से बेहतर इलाज देने के लिए जिले में भी ट्रॉमा सेंटर बना है।
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आबकारी मंत्री के प्रयास से सालों बाद ट्रॉमा सेंटर शुरू तो हो गया, लेकिन वहां गंभीर मरीजों का इलाज शुरू नहीं हुआ। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती तक नहीं हुई है और जिले की चार सीएचसी से चिकित्सकों को अटैच कर सर्दी व खांसी के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
जिले में करीब आठ साल पहले गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर बना था, उस समय भी संचालन की खानापूर्ति कर दी गई और विशेषज्ञ चिकित्सक तक तैनात नहीं हुए। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कुछ समय बाद ट्रॉमा सेंटर बंद हो गया। सालाें बाद फिर से आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर करीब एक माह पहले ट्रॉमा सेंटर का दोबारा संचालन कर दिया गया। इस बार उम्मीद थी कि ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज होगा, लेकिन इस बार भी ट्रॉमा सेंटर में सिर्फ सर्दी, खांसी के ही मरीज देखे जा रहे हैं। हादसों में घायल व गंभीर मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं हैं। घायलों का इलाज अभी भी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हो रहा है और अधिक गंभीर मरीज लखनऊ रेफर हो रहे हैं।
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चार सीएचसी से चिकित्सक किए गए संबद्ध
हरदोई। ट्रॉमा सेंटर में वैसे तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जानी है। इसके लिए पूरे स्टाफ की नियुक्ति अलग से होनी है, लेकिन जिले के जिम्मेदारों ने ट्रॉमा सेंटर का संचालन जल्द करने के चक्कर में जिले के ही चार सीएचसी के चिकित्सकों की अलग-अलग दिनों पर तैनाती कर खानापूर्ति कर दी। हड्डी रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। इनमें बावन अधीक्षक पंकज मिश्रा को नोडल बनाया गया है, जबकि भरावन, बेहंदर और कोथावां से चिकित्सक डॉ. रोहित सिंह, डॉ. विनीत शुक्ला और डॉ. रिजवान खान को तैनाती दे दी गई। एक अन्य चिकित्सक डॉ. उपेंद्र सिंह की भी तैनाती है, लेकिन उन्होंने त्याग पत्र दे दिया है।



ओपीडी में भी आ रहे इक्का दुक्का मरीज
हरदोई। ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज न होकर सर्दी, खांसी का इलाज हो रहा है, लेकिन उसमें भी इक्का दुक्का मरीज आ रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी में 15 मार्च को तीन मरीज, 16 मार्च को दो मरीज, 17 मार्च को चार मरीज, 18 मार्च को दो मरीज और 19 मार्च को तीन मरीज ही पहुंचे। लोगों में जानकारी का अभाव होने की वजह से ट्रॉमा सेंटर में मरीज ही नहीं पहुंच रहे। स्टाफ भी खानापूर्ति करके चला जाता है।



2016 में 2.61 करोड़ से बना था ट्रॉमा सेंटर
हरदोई। हादसों में घायल या गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रोड पर नयागांव के पास वर्ष 2016 में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराया गया। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर 2.61 करोड़ रुपये खर्च किए गए और सेंटर में 20 बेड के साथ उपकरण भी खरीदे गए। कोविड के दौरान ट्रॉमा सेंटर को क्वारंटीन होम बन गया। ट्रॉमा सेंटर का संचालन सुचारू ढंग से न होने से हर साल 1800 से 2000 गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ रेफर करना पड़ता है। तमाम सुविधाओं के बाद भी मरीजों को ट्रॉमा सेंटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है।


ट्रॉमा सेंटर में इतने पद हैं स्वीकृत
हरदोई। जानकारी के अनुसार ट्राॅमा सेंटर संचालित करने के लिए शासन की ओर से चिकित्सक समेत पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 50 पद ट्रॉमा सेंटर में स्वीकृत हैं। ट्रॉमा सेंटर के लिए तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ), जनरल सर्जन एनेस्थेटिक व आर्थोपेडिक चिकित्सक में दो-दो पद, कुल नौ चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा 15 स्टाफ नर्स, तीन ओटी टेक्नीशियन, तीन एक्सरे टेक्नीशियन, दो लैब टेक्नीशियन, नौ नर्सिंग अटेंडेंट और सेवा प्रदाता एजेंसी के माध्यम से मल्टी टास्क वर्कर के पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
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ट्रॉमा सेंटर में एक दो गंभीर मरीज जाते हैं, विशेषज्ञ चिकित्सक मेडिकल कॉलेज से ऑन कॉल भेजे जाते हैं। ईएमओ भी तैनात हैं। पद तो खाली हैं उसके लिए शासन को दो बार पत्र भेजा गया है। चिकित्सक आते ही तैनाती दी जाएगी। -डॉ. रोहताश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
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