शाहाबाद। सेना की जासूसी करने में धरे गए शाहाबाद के तीन युवकों में एक वकील और एक बैंक कैशियर का बेटा हैं। जबकि एक के पिता राजमिस्त्री हैं। तीनों ने परिजनों को मोबाइल नेटवर्किंग कंपनी में काम करने की जानकारी दी थी। उनकी गिरफ्तारी से परिवार के लोग हैरान और परेशान हैं।
सेना की जासूसी करने में जिले के पांच युवकों को आरोपी बनाया गया है। इसमें शहर के विनीत दीक्षित और गौरव मिश्रा को पहले ही एटीएम गिरफ्तार कर चुकी है। अब शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के सुमित और पद्मन को भी गिरफ्तार किया गया है। जबकि शोभित सिंह फरार है।
पद्मन के पिता अरुण रस्तोगी ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की बिलग्राम शाखा में कैशियर और शोभित के पिता हरिनाम सिंह तहसील के बड़े वकील हैं। सुमित के पिता राजकिशोर राजमिस्त्री का काम करते हैं। शाहाबाद के मोहल्ला चौक निवासी अरुण अब परिवार के साथ लखनऊ में शिफ्ट हो गए हैं।
पद्मन उनका इकलौता बेटा है। वह कहां क्या करता था इसकी परिवार को कोई जानकारी नहीं थी। हरिनाम की छह संतानों में सिर्फ शोभित ने गाजियाबाद से बीटेक किया है। उसने परिजनों को ट्राई टेलीकॉम में नौकरी करने की जानकारी दी थी। हरिनाम ने बताया कि वह लोग वैष्णो देवी के दर्शन करने जम्मू गए थे।
शोभित भी उनके साथ था। उन्होंने बताया कि वह घर पर है लेकिन एटीएस उसे फरार बता रही है। हरिनाम सिंह का कहना है कि एफआईआर की कॉपी देखें तभी कुछ कह सकते हैं।
खेड़ा अजमत निवासी राजकिशोर छोटे बेटे सुमित की गिरफ्तारी की खबर से बहुत ही परेशान हैं। उन्होंने बताया कि सुमित शाहजहांपुर में कंप्यूटर सीखने जाता था। बाद में उसने वहीं नौकरी कर ली। उसने नेट बैंकिंग में नौकरी करने की जानकरी दी थी।
अवैध टेलीफ ोन एक्सचेंज से अंतर्राष्ट्रीय काल कराने वाले गिरोह के सरगना समेत तीन अभियुक्तों की रिमांड अदालत ने स्वीकार कर ली है। मंगलवार की सुबह नौ बजे से यह अभियुक्त एटीएस की रिमांड पर होंगे।
जिन अभियुक्तों की रिमांड एटीएस को मिली है उसमें दिल्ली के महरौली से पकड़ा गया अवैध एक्सचेंज का मास्टर माइंड गुलशन सेन और सीतापुर से पकड़ा गया उसका साथी श्याम बाबू उर्फ वीरूऔर लखनऊ के मड़ियांव से पकड़ा गया शिवेंद्र मिश्र उर्फ कपिल शामिल है।
गौरतलब है कि 24 जनवरी को लखनऊ, हरदोई, सीतापुर और नई दिल्ली से 11 लोगों को गिरफ्तार कर एटीएस ने अवैध तरीके से टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था।
एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि रिमांड के दौरान एटीएस यह पता करने की कोशिश करेगी कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल किस तरह से किया गया। साथ ही इससे किसको कितना फायदा हो रहा था।
किन किन अभियुक्तों के एकाउंट में पैसे पहुंचे हैं और बाहर से आने वाली काल के गेटवे को पास करके भारत में बैठे व्यक्ति तक किस तरह से काल पहुंचाई जा रही थी।
पैसे कहां से मिलते थे और अभियुक्तों तक पैसा पहुंचने का क्या माध्यम था, इसके बारे में भी एटीएस पूछताछ करेगी। आईजी ने बताया कि रिमांड सात दिन की मिली है। संभव है कि इससे संबंधित और भी गिरफ्तारियां हों और बरामदगी भी हो सकती है।