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अंजुमन इस्लामिया के छह सदस्यों की जमानत

Tue, 11 Jul 2017 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
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हरदोई। धोखाधड़ी के मामले में शनिवार रात गिरफ्तार किए गए अंजुमन इस्लामिया के छह सदस्यों की जमानत अर्जी मंगलवार को स्वीकार कर ली गई। जिला जज ने सुनवाई के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ताआें के तर्क को ध्यान में रखते हुए जमानत दे दी। अंजुमन इस्लामिया के सदस्याें को जमानत की राशि तय होने और जमानत दाखिल होने तक जेल में ही रहना होगा।
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लगभग चार माह पहले पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक नजमुल हसन ने सदर कोतवाली में पुलिस लाइन की जमीन का फर्जी बैनामा करा कब्जा कर लेने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना में अंजुमन इस्लामिया के कथित सदर मोहम्मद खालिद, हफीज अहमद खॉ, सरताज अहमद खॉ, अहमद अली, फारूख राशिद, इंतजार हुसैन इराकी और डाक्टर मोहम्मद इमरान बेग के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपियाें ने उच्च न्यायालय से स्टे हासिल कर लिया था। शनिवार को पुलिस को स्टे खारिज होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने अंजुमन इस्लामिया के सदर समेत सात लोगों को शनिवार रात ही हिरासत में ले लिया था। सदर मोहम्मद खालिद ने अपना स्टे खारिज न होने की बात कही थी जिस पर उन्हें रिहा कर दिया गया था। शेष छह लोगों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को जेल भेजे गए अंजुमन इस्लामिया के सदस्यों की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद तारिक और विजेंद्र सिंह ने जमानत का प्रार्थनापत्र जिला जज के सामने प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद जिला जज जयशील पाठक ने सभी छह आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी। साथ ही यह भी कहा है कि जमानत की राशि संबंधित मजिस्ट्रेट के द्वारा निर्धारित की जाएगी। इसके बाद जमानत प्रस्तुत करने पर आरोपी रिहा किए जाएंगे।


रसूख के आगे फाइलों में दब जाते थे गोलमाल
धार्मिक भावनाओं की आड़ में खुद का भला करने में लगे रहे कथित सदर
हरदोई। अंजुमन इस्लामिया के नाम पर पिछले एक दशक से जमकर खेल किया गया। धर्म विशेष के लोगों की आस्था का लाभ भी फर्जीवाड़ा करने वालों ने जमकर उठाया। गड़बड़ियाें का खुलासा कई बार हुआ लेकिन सदर के राजनीतिक रसूख से उसे दबा दिया गया। गड़बड़ियों की रिपोर्ट तत्कालीन अधिकारियों ने शासन को भेजी थी लेकिन यह रिपोर्ट फाइलों  में कैद होकर रह गई।
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अंजुमन इस्लामिया में सदर पद को लेकर तकरार चल रही है। मामले के तूल पकड़ने पर वक्फ बोर्ड के निर्देश पर यहां रिसीवर भी बैठाया गया था। सबसे पहले एआर कोआपरेटिव मोहम्मद असलम, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभियंता वहाजुद्दीन, तत्कालीन तहसीलदार न्यायिक जमाल अहमद सिद्दीकी रिसीवर रह चुके हैं। गड़बड़ियाें को लेकर 20 नवंबर 2012 को तत्कालीन रिसीवर सदर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभियंता वहाजुद्दीन  ने शासन को एक रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि अंजुमन इस्लामिया के बैंक खाताें से लेकर संपत्तियाें तक में गड़बड़ी है। अंजुमन इस्लामिया के कथित सदर ने वक्फ की संपत्तियाें को अंजुमन की संपत्ति बताने का प्रयास किया। इतना ही नहीं निजी लाभ के लिए अंजुमन के साथ साथ वक्फ की संपत्तियों का भी इस्तेमाल किया।


रिपोर्ट में इन गड़बड़ियों का था उल्लेख
- 17 अक्टूबर 2011 को मोहम्मद असलम पहली बार रिसीवर बनाए गए थे। उनके चार्ज लेने के बाद अंजुमन के कथित सदर मोहम्मद खालिद ने वक्फ के सभी खाताें से 20 अक्टूबर को धन निकालकर एक्सिस बैंक के जनरल फंड के खाते में सवा दो लाख रुपये स्थानांतरित कर दिए।
28 दिसंबर 2011 को मजिस्ट्रेट और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वक्फ का अधूरा चार्ज दिया गया।
- उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद विधिवत चार्ज नहीं दिया गया। जामा मस्जिद के मुख्य द्वार में जबरन ताला डलवा दिया गया। वक्फ की रसीद पर वक्फ शब्द काटकर किराया वसूला गया।

संस्था का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए किया
संस्था का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। अंजुमन के कथित सदर मोहम्मद खालिद सत्ता के साथ चोला बदलते रहे। इसके कारण उनका सियासी रसूख लगातार बरकरार रहा। जिला स्तरीय अधिकारियाें और कई सामाजिक कार्यकर्ताआें ने सबूताें के साथ स्पष्ट आख्या शासन को भेजी लेकिन वक्फ बोर्ड के तत्कालीन जिम्मेदाराें की सांठगांठ से मामले को हमेशा दबा दिया जाता था। सदर ने पुलिस लाइन की चहारदीवारी के अंदर स्थित संपत्तियाें पर का भी फर्जी बैनामा करना शुरू कर दिया था। पुलिस की सख्ती से खेल सामने आ गया। 
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