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अबोध पुत्र के साथ महिला ने खुद को जलाया, सुनकर पति ने भी खाया जहर

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प्रतापनगर (हरदोई)। बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चठिया में पति के अपनी ममेरी बहन के यहां तीन दिन रुकने के बाद घर लौटने से नाराज महिला ने सोमवार दोपहर मासूम बेटे सहित खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। शोर सुनकर जब तक लोग मदद को पहुंचे और आग बुझाई, तब तक मां और बेटे की गंभीर रूप से झुलसकर मौत हो गई। खेत पर मौजूद पति को घटना का पता चला तो उसने जहर खा लिया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चश्मदीद पांच वर्षीय बेटी ने पुलिस को पूरी घटना बताई। मामले की जांच की जा रही है।
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ग्राम चठिया निवासी रतिराम मौर्या किसान है। तीन दिन पहले वह ममेरी बहन अगाना के गांव पट्टी गया था। वहां स्लैब डलवाने के बाद रविवार शाम घर लौटा था। इसको लेकर रात में रतिराम और उसकी पत्नी अरुणा (28) के बीच विवाद हो गया। सोमवार सुबह 10 बजे रतिराम खेत गेहूं काटने चला गया। घर में अरुणा, उसकी पांच वर्षीय पुत्री आशी और डेढ़ वर्षीय पुत्र अहम थे। दोपहर एक बजे अरुणा ने कमरे में बेटे अहम और खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। दोनों को जलता देख पुत्री आशी ने शोर मचाया तो पड़ोसियों की भीड़ लग गई। उन्होंने पंपिंग सेट चलाकर किसी तरह आग बुझाई लेकिन तब तक मां-बेटा दम तोड़ चुके थे। ग्रामीण खेत में काम कर रहे रतिराम के पास पहुंचे और उसे पूरा वाकया बताया। बदहवास रतिराम ने खेत में ही जहर खा लिया। आनन-फानन ही एंबुलेंस बुलाकर रतिराम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतका के मायके ग्राम पुरवा थाना बघौली से परिजन भी चठिया पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अरुणा और रतिराम का विवाह सात वर्ष पूर्व हुआ था। प्रभारी निरीक्षक बेनीगंज शिवशंकर सिंह ने अरुणा के ससुरालियों और ग्रामीणों से पूछताछ की, लेकिन लोग चुप्पी साधे रहे। अरुणा की पुत्री आशी ने उन्हें पूरी घटना बताई। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि शवों का पंचनामा तहसीलदार की मौजूदगी में भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना को लेकर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर जांच की जाएगी।

मामूली सी बात पर विवाद इतना बढ़ जाएगा इसकी कल्पना रतिराम ने नहीं की थी। रविवार को जब रतिराम ममेरी बहन के गांव पट्टी से लौटा तो उसकी पत्नी अरुणा ने खाना अलग बनाया था। उसने सोमवार सुबह ही उससे कहा था कि लौटकर आओगे तो कुछ नहीं मिलेगा।
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रतिराम के परिवार में माता-पिता और छोटा अविवाहित भाई भी है। ग्रामीणों की माने तो खाना अलग बनाए जाने पर रतिराम ने नाराजगी जताई और रात में खाना नहीं खाया। इसके बाद सोमवार सुबह भी अरुणा ने खाना अलग बनाने की तैयारी की, लेकिन नाराज रतिराम ने खाना खाने से इनकार कर दिया और खेत चला गया। इस दौरान अरुणा ने नाराजगी भरे लहजे में कहा था कि खेत जा रहे हो, लेकिन लौटकर आओगे तो कुछ नहीं मिलेगा। रतिराम ने इस बात को बेहद हल्के में लिया, लेकिन कौन जानता था कि अरुणा इस कदर नाराज है कि अपने साथ-साथ बेटे की जिंदगी भी जला देगी।

नाराज अरुणा ने अबोध पुत्र के साथ जब खुद को आग के हवाले किया तो वह कमरे में ही छटपटाती रही। कमरे से बाहर निकलने की कोशिश तक उसने नहीं की। आग लगने से कमरे का बड़ा हिस्सा और सामान भी जल गया। आग बुझाने के बाद जब ग्रामीण अंदर घुसे तो मां-बेटे के शव बेड पर पड़ेे थे।
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