हरदोई। जनता कर्फ्यू ने निश्चित रूप से कोरोना चेन तोड़ने में मदद की है लेकिन इस एक दिन के कर्फ्यू ने कइयों को भोजन की कीमत भी बता दी।
कर्फ्यू के चलते रविवार को जब हर दुकान बंद थी और लोग घरों में कैद थे तो वहीं कुछ ऐसे भी थे जो अपने कर्त्तव्यों के लिए घरों से बाहर निकलना था। मूल्यांकन को लेकर कई कालेजों में आरक्षियों की ड्यूटी लगी है, लेकिन भूख तो मिटानी ही है।
इसको लेकर सभी को पुलिस लाइन स्थित मेस से भोजन लाने को कहा गया जिसके बाद सभी आरक्षी मेस से अपने अपने टिफिन को लेकर भोजन लेकर पैदल अपने ड्यूटी स्थल भी पहुंच गए लेकिन दूसरी तरफ निजी ड्यूटी करने वाले जैसे बसों पर चालक परिचालक जो रात से फंसे थे वह फंसे ही रह गए।
घंटाघर रोड पर बसों के अंदर फंसे चालक परिचालाकों ने नुमाइश चौराहे से होकर पैदल अपने रिश्तेदारों के यहां से भोजन लाने का प्रयास भी किया लेकिन पुलिस की डांट खाकर फिर वापस आ गए। इन लोगों को यही कहना था कि भइया भूख से बुरा हाल है।