हरदोई। तकरीबन नौ साल पुराने दुष्कर्म, पिटाई और जान से मारने की धमकी के मामले में अपर जिला जज (एफटीसी महिला) यशपाल ने एक शख्स को दोषी करार दिया। दोषी को 10 साल की सजा सुनाने के साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
पिहानी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 26 दिसंबर 2017 की रात वह घर में अकेली थीं। पति मजदूरी करने बाहर गए हुए थे और सास शाहाबाद मेें थीं। देवर खरीदारी करने गए थे। इस दौरान गांव का इमरान घर में घुस आया और दुष्कर्म किया। विरोध करने पर पिटाई करते हुए गला दबा दिया। कुछ लोगों के आ जाने पर आरोपी भाग गया था।
मामले में अगस्त 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को पेश किया गया। मेडिकल में महिला के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। गर्भावस्था जांच निगेटिव और वेजाइनल स्मीयर में स्पर्मेटोजोआ भी नहीं मिला था। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर अभियोजन की हानि पर सवाल उठाए। न्यायालय ने चिकित्सीय साक्ष्य को निर्णायक न मानते हुए कहा कि घटना और मेडिकल परीक्षण के बीच काफी समय बीत चुका था। न्यायालय ने यह भी माना कि शरीर पर चोट न होना मात्र पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।
पीड़िता और उसके देवर नबीशेर की गवाही को कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में देरी का कारण रिकॉर्ड से स्पष्ट है और पीड़िता ने पुलिस के बाद उच्चाधिकारियों और मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाया था। इन्हीं सब आधार पर अपर जिला जज ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ था मामला
महिला ने पूरी घटना की शिकायत कोतवाली में अगले ही दिन दर्ज कराई थी। इसके बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उच्चाधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन फिर भी मामला दर्ज नहीं हुआ। इस पर महिला ने न्यायालय में वाद दर्ज किया। न्यायालय के आदेश पर अगस्त 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।