धान बेचने के लिए बिना भूमि के ही सत्यापन का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए बिना भूमि के ही सत्यापन के आरोपी चकबंदी लेखपाल लोकेश की मुसीबत कम नहीं हो रही है। जिला जज रीता कौशिक ने आरोपी चकबंदी लेखपाल की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों व आरोपों की प्रकृति को गंभीर मानते हुए कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत दिए जाने का आधार पर्याप्त नहीं पाए हैं।
पिहानी के चकबंदी अधिकारी हरिशंकर यादव ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि धान खरीद वर्ष 2025-26 में चकबंदी क्षेत्र के किसानों के पंजीकरण प्रपत्रों का सत्यापन कर उन्हें पोर्टल पर लॉक करने की जिम्मेदारी लेखपाल लोकेश पर थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में फर्जी आवेदन पत्रों को सत्यापित कर लॉक किया गया, जिससे शासन की योजनाओं और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। न्या
यालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है, उसके विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं और उसने कोई अवैध लाभ नहीं लिया है। कहा कि संबंधित अवधि में वह अन्य शासकीय कार्यों में व्यस्त था और उसके विरुद्ध पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी विभागीय कर्मचारी होते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों में अनियमितता का दोषी है। जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आदेश में उल्लेख किया कि उपलब्ध साक्ष्य, आरोपों की प्रकृति और संभावित प्रभाव को देखते हुए अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है।