हरदोई। सरकार और शासन किसी भी क्षेत्र में सिंडिकेट बर्दाश्त नहीं करता। बावजूद इसके सहकारिता विभाग की एक निर्माण संस्था ने गजब कर डाला। दो वृहद गो संरक्षण केंद्रों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मौके पर निर्माण कार्य शुरू करा दिए गए। जब टेंडर खुले तो दोनों ही जगहों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण कार्य पूरे कराए जा चुके थे। कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों की मिलीभगत के बिना कोई भी फर्म इतना बड़ा खतरा मोल लेने से रही। टेंडर खोले जाने के चौथे दिन ही तारीख और समय के साथ जीपीएस वाली फोटो पूरे खेल की पोल खोल रही है। (संवाद)
सीएम डैशबोर्ड पर 65 प्रतिशत काम पूरा
प्रकरण-1
बिलग्राम विकास खंड के गुजरई में वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण हो रहा है। 1,60,12,000 रुपये की लागत से बनने वाले इस गो संरक्षण केंद्र के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण श्रम विकास सहकारी संघ है। सीएम डैशबोर्ड के मुताबिक निर्माण कार्य 65 प्रतिशत पूरा हो गया है। छह अप्रैल को इसका टेंडर खुला था। मतलब चार माह में ही कार्यदायी संस्था ने काम को इतनी रफ्तार दे दी। अब इसकी हकीकत जान लीजिए। टेंडर खुलने से पहले ही मौके से 20 प्रतिशत से ज्यादा काम हो चुका था। मतलब यह कि निर्माण करा रही फर्म को पता था कि टेंडर उसे ही मिलेगा तभी टेंडर खुलने से पहले ही काम ने रफ्तार पकड़ ली।
अप्रैल में खोला गया था टेंडर
प्रकरण-2
कछौना विकास खंड के बालामऊ में भी वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण हो रहा है। इस कार्य के लिए भी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण श्रम विकास सहकारी संघ है। इसकी भी लागत 1.60 करोड़ रुपये है। सीएम डैशबोर्ड में इस गो संरक्षण केंद्र की प्रगति भी 65 प्रतिशत दर्ज है। इसका भी टेंडर अप्रैल में खोला गया था। टेंडर खुलने से पहले ही 20 प्रतिशत काम मौके पर कराया जा चुका था। यहां भी बात वही कि संबंधित फर्म को पहले से ही पता था कि टेंडर उनको ही हासिल होगा। बीच-बीच में आए मौसम में बदलाव के बाद भी 65 प्रतिशत काम पूरा हो जाना अचरज में डालता है।
जनवरी में पड़े टेंडर, खुल पाए अप्रैल में
दोनों वृहद गो संरक्षण केंद्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई थी। टेंडर 23 जनवरी 2026 को पड़े थे। इसके लगभग तीन माह बाद तक टेंडर खोले ही नहीं गए। छह अप्रैल को टेंडर खोले गए और दोनों ही काम एक ही फर्म को दे दिए गए। टेंडर प्रक्रिया में आठ फर्मों ने प्रतिभाग किया था लेकिन प्रबंधन के माहिर अभियंताओं ने ज्यादातर फर्मों में कुछ न कुछ खामी दिखा दी और महज दो प्रतिशत नीचे की दरों पर काम आवंटित कर दिया।
मिश्रिख सांसद ने की शिकायत
मिश्रिख से सांसद अशोक रावत ने पूरे मामले की शिकायत पूर्व में ही सहकारिता के प्रमुख सचिव से की थी। इसमें उक्त दोनों गो संरक्षण केंद्रों की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया। आरोपों के घेरे में कार्यदायी संस्था के तत्कालीन अधिशासी अभियंता भी हैं। शिकायत में कहा गया कि टेंडर खोले बिना 20 प्रतिशत काम पूरा हो जाना गुणवत्ता के साथ ही विभागीय अभियंताओं की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है। निविदा प्रक्रिया के साथ ही निर्माण कार्यों की जांच भी उच्च स्तरीय तकनीकी समिति से कराए जाने की मांग सांसद ने की।
मामला संज्ञान में आया है। मेरी तैनाती अभी कुछ दिन पहले हुई है। बृहस्पतिवार को ही मामला मुझे पता चला है। सहायक अभियंता और अवर अभियंता से पूरी रिपोर्ट मांगी है। किन परिस्थितियों में टेंडर खुलने से पहले ही काम शुरू हो गया यह रिपोर्ट से ही पता चलेगा। -संदीप कुमार,
अधिशासी अभियंता, उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण श्रम विकास सहकारी संघ