हरदोई। रंजिश और लेनदेन को लेकर दर्ज कराए गए परिवाद में महिला की शील पर गंभीर आरोप लगाना परिवादी के लिए मुसीबत बन गया। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने परिवाद को निराधार और बयानों में विरोधाभास पाए जाने पर खारिज कर दिया। परिवादी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना विपक्षी महिला को दिए जाने का आदेश दिया गया।
पिहानी कोतवाली क्षेत्र के कल्यानी निवासी इंद्रेश कुमार ने न्यायालय में वाद दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि गांव के मुनेंद्र से पांच हजार रुपये उधार लिए थे। बाद में 15 हजार रुपये वापस किए थे। वाद में आरोप लगाया कि 21 दिसंबर 2023 को मुनेंद्र, जितेंद्र, शैलेंद्र, ताम्रध्वज और रानी ने उसकी पिटाई की। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए 40 हजार रुपये और जैकेट छीन ली। आरोपियों ने कपड़े फाड़ दिए और मुनेंद्र की पत्नी को निर्वस्त्र कर उसके साथ फोटो और वीडियो बनाए। दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने की धमकी दी। वाद को परिवाद के रूप में दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान प्रार्थनापत्र और न्यायालय में दिए गए बयानों में गंभीर विरोधाभास मिले। पांच हजार रुपये के लेन-देन और ब्याज के संबंध में भी परिवादी का हिसाब अदालत को सही नहीं मिला। प्रार्थनापत्र में महिला को निर्वस्त्र कर फोटो-वीडियो बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया था लेकिन बयान के दौरान परिवादी ने इस महत्वपूर्ण आरोप का कोई उल्लेख नहीं किया।
प्रार्थनापत्र में पैन कार्ड, सिम कार्ड और 40 हजार रुपये छीनने और गर्दन दबाने की बात कही गई थी जबकि बयान में मोबाइल छीनने और कमर पर रॉड मारने की बात कही गई। जातिसूचक शब्द कहे जाने का आरोप भी न्यायालय में नहीं दोहराया। मुख्य गवाह संतोष को अदालत में पेश नहीं किया गया जबकि एक अन्य गवाह छोटेलाल के गांव का निवासी होने पर भी सवाल सामने आया। परिवाद को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया और इंद्रेश पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
ऐसी प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना अदालत का दायित्व
अदालत ने माना कि महज पांच हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में महिला को निर्वस्त्र कर फोटो-वीडियो बनाए जाने की कहानी विश्वास योग्य नहीं है। न्यायालय ने महिला के शील पर इस तरह का आरोप लगाने को गंभीर माना और कहा कि ऐसी प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना अदालत का दायित्व है।