शासन के कड़े निर्देश के बाद भी ठंड से बचाव क ो रैन
बसेरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आलम यह है कि नगर में बने रैन बसेरो
की बदहाल स्थिति है। इनमेें गंदगी का अंबार है। यहां लेटना तो दूर किसी का
खड़ा होना भी मुश्किल है। ऐसे में कमरे का टूटा पड़ा दरवाजा व्यवस्था के
दावों की पोल खोलने को काफी है।
प्रशासन की तरफ से कमरे की नियमित सफाई भी
नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा गरीबाें को लेटने के लिए पियार व कंबल तक
का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। रैन बसेरा के पूरे परिसर में गंदगी का
माहौल है। इसके अलावा गरीबों को पानी पीने व शौच का कोई इंतजाम नहीं है।
रैन बसेरा परिसर में लगा नल टूटा पड़ा है।
हैंडपंप चलाने के लिए उसमें
हत्था तक नहीं लगा है। इस परिसर में बने शौचालय में भी गंदगी की भरमार है।
हालत यह है कि रैन बसेरा में आश्रय पाने के लिए इस भीषण सर्दी में भी अभी
तक किसी ने इधर का रुख नहीं किया है। उधर, लगभग दो दर्जन स्थानों पर
जलाए जा रहे अलाव में भी गीली लकड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे
लोग परेशान हैं।
एसडीएम मंशाराम वर्मा ने बताया कि रैन बसेरो में कोई रुकता
नहीं, जिससे सफाई आदि की ओर ध्यान नहीं दिया गया। वह मंगलवार को तहसीलदार
को भेजकर रैन बसेरोें की व्यवस्था सही करवाएंगे। उधर, मल्लावां क्षेत्र में
हाड़कंपाऊं ठंड से आम जनमानस परेशान है। इसके बावजूद पालिका द्वारा अलाव
के नाम पर भूसी डालकर खानापूरी की जा रही है।
जिससे लोगों को भारी संकट से
गुजरना पड़ रहा है। वहीं अलाव जलवाने के आदेश जो डीएम द्वारा दिए गए थे वह
हवा हवाई साबित हो रहे हैं। शाम 4 बजे, बड़े चौराहे पर अलाव जलाने के
स्थान पर दो चार किलो भूसी पड़ी हुई थी और आने जाने वाले राहगीर कोहरे व
ठंड से परेशान थे।
ऐसे में लोग इधर उधर चाय की दुकानों पर खड़े होकर बसों
का इंतजार कर रहे थे, जबकि शाम 4:45 बजे, छोटे चौराहे पर कहीं अलाव जलता
नजर नहीं आ रहा था। लोग ठंड से कांपते नजर आ रहे थे। वहीं राघौंपुर रोड पर
कहीं अलाव नहीं जल रहा था। इसी तरह शाम 5:10 बजे, चुंगी नंबर एक पर भी यही
हाल था, जबकि डीएम द्वारा कस्बे के मोहल्लों व मुख्य चौराहों पर अलाव
जलवाने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद पालिका प्रशासन उनके आदेशों को
ठेंगा दिखा रहे हैं।