हरदोई। कोरोना संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले हरियावां सीओ नागेश मिश्रा की जांच को लिया गया नमूना ही मेडिकल कालेज ने कंटामिनेटेड (खराब) बताकर रिजेक्ट कर दिया था। दो जुलाई को भेजे गए इस नमूने की जांच रिपोर्ट न आने के कारणों को तलाशने पर ये सच्चाई सामने आई। अब सीएमओ ने मामले में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही है।
मूल रूप से प्रयागराज निवासी हरदोई में हरियावां सीओ नागेश मिश्रा ने अस्वस्थ होने पर दो जुलाई को जिला अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए नमूना दिया था, लेकिन इसकी रिपोर्ट ही नहीं आई। इस पर जब नागेश मिश्रा ने जानकारी की तो पांच जुलाई को पता चला कि स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कालेज की ओर से ये सूचना दे दी गई थी कि नागेश की कोरोना जांच को लिया गया नमूना कंटामिनेटेड हो गया है। इसके बाद नागेश मिश्रा ने जिला अस्पताल में छह जुलाई को ट्रूनेट मशीन से कोरोना की जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इस पर नागेश सरकारी आवास पर ही रुक गए, लेकिन उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही।
नौ जुलाई को स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर वह परिचितों के साथ लखनऊ के गोमतीनगर स्थित प्राइवेट अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इस पर उन्हें पहले राममनोहर लोहिया चिकित्सालय और फिर पीजीआई ले जाया गया। जहां 12 जुलाई की सुबह उनकी मौत हो गई। पूरे मामले पर सीएमओ डॉ. एसके रावत ने कहा कि मशीन ने जो रिपोर्ट दी, वही सीओ को बताई गई। सीएमओ ने बताया कि नमूना शाम को छह बजे के बाद लखनऊ मेडिकल कालेज नहीं लेता है। दो जुलाई को देर हो जाने के कारण तीन जुलाई को नमूना भेजा गया था। नमूना कैसे खराब हुआ इसको लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। सीएमओ ने कहा कि प्रकरण में अगर किसी की लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।