जिले के परिषदीय जूनियर हाईस्कूल में कंप्यूटर शिक्षा
शुरू हुए आठ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, पर स्कूल के विद्यार्थी
कंप्यूटर के माउस और की-बोर्ड के विषय में नहीं जान सके हैं। स्कूलों में
कंप्यूटर तो पहुंचा दिए गए, पर स्कूलों में न तो प्रशिक्षक हैं और न ही
बिजली व्यवस्था, जिससे स्कूलों में लगे कंप्यूटर धूल खा रहे है, जबकि
कंप्यूटर शिक्षा पर प्रति वर्ष लाखों रुपये व्यय किए जा रहे हैं।
शासन
ने परिषदीय स्कूलों के जूनियर विद्यालय के विद्यार्थियों को कंप्यूटर
शिक्षा मुहैया कराने की योजना जिले में वर्ष 03-04 में शुरू की थी। वर्ष
05-06 में जिले के स्कूलों में तैनात एक-एक टीचर और शिक्षामित्र को 90 घंटे
का प्रशिक्षण भी दिया गया था। जिन स्कूलों में कंप्यूटर लगे हैं, वहां पर
कंप्यूटर अनुदेशक की तैनाती की गई है।
विभाग की ओर से जिन स्कूलों को
कंप्यूटर मुहैया कराए गए हैं, उनमें से अधिकतर ऐसे इलाकों में हैं, जहां पर
बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्कूलों के कंप्यूटर बंधे पड़े हैं
और उनका उपयोग नहीं हो रहा है। इस कारण विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा
का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उधर, शासन ने परिषदीय स्कूलों में कंप्यूटर
विद्यार्थियों की शिक्षा को मुहैया कराए थे, पर उपयोग सरकारी योजनाओं के
क्रियान्वयन के लिए होने लगा है। कभी चुनाव, तो कभी कई योजनाओं के
आवेदनों की फीडिंग, तो कभी मतदाता पहचान पत्र बनाने, तो कभी जनगणना की
फीडिंग के काम आ रहे हैं।
स्कूलों से विभाग को कंप्यूटर पूरे भेजे जाते
हैं, पर वापसी में उनके आधे पार्ट गायब हो जाते हैं। इससे उनका प्रयोग
स्कूल में नहीं हो पा रहा है। कई तो इस हाल में पहुंच गए कि वह चल ही नहीं
रहे हैं। उधर, स्कूलों में कंप्यूटर तो पहुंच गए, पर उनकी सुरक्षा करना
टेढ़ी खीर है। अधिकतर स्कूल गांव से बाहर बने हुए हैं।
इस कारण उनमें आए
दिन चोरी होती रहती है। कई स्कूलों में कंप्यूटर के पार्ट चोरी हो चुके
हैं। चोरी के डर से स्कूलों के कंप्यूटर प्रधान के घर पर रखने से भी टीचर
कतराते हैं। कारण कि उनके घर में पहुंचने के बाद उनका वापस आना मुश्किल
होता है। इससे उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहता है।