हरदोई। तीन माह से चिकित्सालय में उपलब्ध सीवी नाट मशीन ने जिले में 129 एमडीआर रोगी यानी टीबी की थर्ड स्टेज के रोगी खोज निकाले हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में अफरातफरी मची है। इस मशीन ने 228 रोगियों की जांच की थी।
टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए जिले में क्षय रोग नियंत्रण सरीखे कार्यक्रम चल रहे हैं। साधारण टीवी के छह और आठ माह के कोर्स के पूरा होने के बावजूद तीसरी और डेंजर स्टेज में पहुंचने वाली एमडीआर टीवी के रोगी भी जिले में कम नहीं हैं। इसकी जांच मार्च माह से पूर्व बरेली में होती थी। अब सीवी नाट मशीन तीन माह में 228 जांचें करने के बाद 129 पॉजिटिव एमडीआर रोगी पाए गए।
जिला क्षयरोग अधिकारी डा. आरपी रावत ने बताया कि अभी तक जो भी एमडीआर के संभावित रोगी आते थे वह पॉजिटिव हैं या नहीं उनको परीक्षण के लिए बरेली भेज दिया जाता था। इस मशीन के आने के बाद एक घंटा 40 मिनट में ही परिणाम सामने आ जाता है जिससे जांचें अधिक व समय पर हो रही हैं इसलिए रोगी अधिक मिल रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग व क्षय रोग कार्यक्रम और भी अलर्ट कर दिया गया है। अभी 32 एमडीआर रोगियों को ठीक भी किया गया है।
एमडीआर पॉजिटिव आने पर भेजे जाते मेडिकल कालेज
क्षय रोग विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य तौर पर टीबी का इलाज छह से आठ माह का होता है। ये दवाएं फेल होने के बाद रोगियों का सीवी नाट से परीक्षण होता है और पॉजिटिव पाए जाते हैं तो मेडिकल कालेज उस जांच को भेजे जाते हैं। वहां पर उनको देखकर यह बताया जाता है कि कौन सी दवाएं उन्हें शूट नहीं कर रही हैं जिनको बदलकर उन्हें परामर्श दे दिया जाता है। उसी से जिले में आकर उनका फिर से इलाज चलता है।
एक रोगी पर खर्च हो रहे ढाई लाख
एक एमडीआर रोगी को स्वस्थ करने के लिए कार्यक्रम में शासन की ओर से अनुमानित खर्चा ढाई लाख बताया गया है। इसलिए रोगियों का दवाओं को बीच में बंद करने से रोगी का पुन: इलाज शुरू करना होता है और कार्यक्रम में लाखों का नुकसान होता है।
24 से 27 माह का होता है एमडीआर इलाज
चिकित्सकाें की माने तो सामान्य तौर पर टीबी का इलाज छह माह का होता है। न ठीक होने पर उसे आठ माह का कर दिया जाता है। इसके बाद भी न ठीक हो तो उसे एमडीआर टीबी की श्रेणी में रखा गया है। जो काफी खतरनाक स्टेज बताई गई है।
एक मरीज बना देता 12 से 17 एमडीआर रोगी
एमडीआर टीबी को खतरनाक इसलिए कहा जाता है क्योंकि संपर्क में रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गलत न होगा कि एक टीबी का मरीज 12 से 17 मरीज और बना देता है।