पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को न समाप्त किया गया, तो जिले के सभी ईंट भट्ठे अगले सीजन में बंद रखे जाएंगे। जिला
पंचायत सभागार में रविवार को ईंट निर्माता कल्याण समिति की बैठक में समिति
अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने यह बात कही।
कहा कि स्वच्छता प्रमाण पत्र की
बाध्यता समाप्त की जाए अन्यथा भट्ठा चलाना संभव नहीं होगा। कहा कि पूरे
प्रदेश में लगभग 18 हजार भट्ठे हैं। यदि बंद हुए तो प्रदेश में चालीस लाख
लोग बेरोजगार हो जाएंगे। कहा कि एक ओर केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में
सस्ते तीन करोड़ मकान गरीबों के बनाने की बात करती है तो दूसरी ओर ऐसे
कानून बनाए जा रहे, जिससे भट्ठा चलाना संभव नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार
से भट्ठा व्यवसाय के लिए सरल खनन कानून बनाने व पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण
पत्र समाप्त करने की मांग की। जिला महामंत्री योगेंद्र मिश्र ने कहा कि
भट्ठा मालिकान विवश होकर हड़ताल पर जा रहे हैं। मौजूदा खनन कानून व
पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र अव्यवहारिक है। कहा कि जब तक समस्याओं का हल
नहीं निकलता तब तक भट्ठे नहीं चलेंगे।
निर्णय लिया गया कि आगामी सीजन में न
तो कोई भट्ठा वाला श्रमिकों को एडवांस बांटेगा और न ही कोयला गिराएगा।
संघर्ष समिति के संडीला तहसील प्रभारी राजा त्रिपाठी ने सभी से एकजुटता की
अपील की। इस मौके पर विमलेश गुप्ता, कपिल गुप्त, मन्नी लाल शाह, बृज मोहन
शुक्ला, अनीसुल हसन, राहुल कपूर, जब्बार खां आदि मौजूद थे।