हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए संसाधन जुटाने में सरकार भले ही कसर न छोड़े, लेकिन संसाधनों का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा। बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखी सीबीसी मशीन पिछले पांच साल से इस्तेमाल ही नहीं की गई। यह बात और है कि इस्तेमाल न होने की वजह पूछने पर जिम्मेदार रिजेंट न होना कहते हैं।
तकरीबन पांच साल पहले क्षेत्रीय विधायक आशीष सिंह आशू के निर्देश पर बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सीबीसी मशीन उपलब्ध कराई गई थी। इसके पीछे मंशा यह थी कि सीएचसी में इलाज के लिए आने वाले लोगों को मामूली जांचों के लिए भटकना न पड़े। मशीन तो आ गई और औपचारिक तौर पर इसके इस्तेमाल का दावा भी किया जाने लगा। तल्ख हकीकत यह है कि मशीन आने के बाद से कभी इसका इस्तेमाल किया ही नहीं गया। विभागीय अधिकारी कुछ भी दावे करें, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस अत्याधुनिक मशीन से जांच करने का तरीका ही बिलग्राम सीएचसी में तैनात कर्मचारियों को नहीं मालूम है। इसके अलावा जांच से इसलिए भी बचा जा रहा है कि कर्मचारियों के पास एक और काम बढ़ जाएगा। यह हाल तब है जबकि बिलग्राम सीएचसी में तीन लैब टेक्नीशियन तैनात हैं। सीबीसी मशीन से हीमोग्लोबिन, क्षय रोग, डीएलसी, मधुमेह, आदि की जांच हो जाती है। पूरे मामले पर सीएचसी के अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार कहते हैं कि मशीन खराब नहीं है। इसमें जो कैमिकल इस्तेमाल किया जाता है, वह सीएचसी पर उपलब्ध नहीं है। रिजेंट उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। सीएमओ डा. रोहताश कुमार का कहना है कि रिजेंट की कोई समस्या नहीं है। अगर रिजेंट खत्म हुआ है तो तत्काल ही भिजवा दिया जाएगा।