हरदोई। यातायात नियमों को तोड़ने पर जुर्माने की राशि में भले ही बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी हो गई हो, लेकिन यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोई विशेष प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। शहर में घंटाघर मार्ग पर सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। इसके चलते चौड़ी सड़क भी संकरी गली सी नजर आती है और हादसों का भय बना रहता है। फुटपाथों पर बसें खड़ी रहने से पैदल चलना भी मुश्किल है।
नुमाइश चौराहे से अमर जवान चौक (सोल्जर बोर्ड चौराहे) तक जाने वाली सड़क को घंटाघर मार्ग कहा जाता है। घंटाघर मार्ग पर सदर तहसील के अलावा राजकीय बालिका इंटर कालेज, राजकीय इंटर कालेज भी है। इसके चलते बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का आवागमन बना रहता है। घंटाघर मार्ग काफी चौड़ा है और इसके दोनों तरफ काफी चौड़े फुटपाथ हैं, लेकिन इन फुटपाथों पर सुबह से लेकर रात तक भारी वाहन कब्जा जमाए रहते हैं। सबसे अधिक संख्या यहां प्राइवेट बसों की होती है।
बस मालिक अपने वाहनों को फुटपाथ पर खड़ा कर देने की नसीहत चालकों को देते हैं और यही कारण है कि यहां आए दिन जाम की समस्या भी बन जाती है। जिला प्रशासन और यातायात निरीक्षक के स्तर से कभी-कभार इन वाहनों के विरुद्ध अभियान चला दिया जाता है, लेकिन फिर मामला ठंडा पड़ जाता है।
रामबहोरन कहते हैं कि यातायात पुलिस के कर्मचारी चौराहों पर ही तैनात रहते हैं। जाम लगने की बड़ी वजह सड़क किनारे फुटपाथों पर खड़े रहने वाले भारी वाहन हैं। इन वाहनों को ही सीज कर देना चाहिए। एक बार कड़ी कार्रवाई होगी तो नसीहत मिल जाएगी।
आदर्श दीक्षित कहते हैं कि बस मालिकों को खुद ही सोचना चाहिए कि फुटपाथ पैदल चलने वाले लोगों के लिए बनाए गए हैं। जब फुटपाथों पर भारी वाहन कब्जा जमाए रहेंगे तो फिर पैदल वाले लोग कहां चलेंगे। बस खड़ी करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अंकुर गुप्ता का कहना है कि घंटाघर मार्ग पर दो-दो स्कूल हैं। बड़ी संख्या में छात्रों की आवाजाही रहती है। ऐसे में फुटपाथों पर बसों का कब्जा रहने से जाम लगता है और लोगों को भी आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उपसंभागीय परिवहन अधिकारी को भी कार्रवाई करनी चाहिए।
रवि कहते हैं कि घंटाघर मार्ग पर्याप्त चौड़ा है, लेकिन बसें खड़ी रहने के कारण यहां मुसीबत हो जाती है। आवागमन में लोगों को परेशानी होती है। पैदल चलने वालों के लिए हर वक्त खतरा बना रहता है।