कटियारी क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित अर्जुनपुर घाट पर
पुल बनने की हसरत लिए तमाम लोग दुनिया से विदा हो गए, पर आज तक उनकी हसरत
और पुल का सपना पूरा नहीं हो सका है। वैसे तो हर चुनाव में पुल सियासती
बवंडर खड़ा करते हुए प्रत्याशियों के लिए मुद्दा बनता रहा है, पर चुनाव के
बाद बवंडर थम जाता है और लोगों की पुल की आस वहीं धरी की धरी रह जाती है।
ज्ञात
हो कि कटियारी क्षेत्र के दो अहम पुल बेड़ीजोर और अर्जुनपुर घाट की मांग
लंबे समय से हो रही है, पर अर्जुनपुर घाट पर नाव हादसे में मारे गए करीब एक
सैकड़ा लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि देने को अर्जुनपुर घाट पर प्राथमिकता
से पुल बनाने को लेकर वादे किए जाते रहे हैं।
इस बाबत क्षेत्र के लोगों ने
बताया कि सन् 1975 में कार्तिक पूर्णिमा में बड़ागांव अर्जुनपुर घाट पर नाव
पर सवार करीब 90 लोग डूब गए थे। तब से लगातार इस स्थान पर पुल बनाने की
मांग की जाती रही। हर चुनाव और कमोवेश सभी प्रत्याशियों के लिए यह पुल
निर्माण मुद्दा बनता रहा है, पर पुल का निर्माण आज तक नहीं हो सका।
साल दर
साल पुल की आस में गुजरते जा रहे और तमाम क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन, हवन
किए, पर पुल न बन सका। पिछले विस चुनाव में पुल का मुद्दा जोरशोर से उठा
था और सपा नेताओं ने वादा भी किया था, पर सपा के सत्ता में आने के बाद भी
पुल न बन सका।
गत लोस चुनाव से पहले तत्कालीन सपा सांसद ऊषा वर्मा ने
अर्जुनपुर और बेड़ीजोर पुलों के लिए प्रयास किए। उनके प्रयास रंग लाए और
बेड़ीजोर पुल मंजूर होने के साथ काम शुरू हो गया, पर अर्जुनपुर की आस पूरी न
हो सकी।
उधर, पीडब्ल्यूडी सूत्रों का कहना है कि जब बेड़ीजोर एवं
अर्जुनपुर पुलों के स्टीमेट का आकलन किया गया था, तब बेड़ीजोर पुल का
स्टीमेट 66 करोड़ तथा अर्जुनपुर पुल का 70 करोड़ के आसपास था। इसके बाद
बेड़ीजोर पुल तो बनना शुरू हो गया, पर अर्जुनपुर पुल की सुध अभी तक किसी को
नहीं आई है।