स्वयं की ही इंद्रिया शत्रु भी हैं और मित्र भी। यदि
इनको वश में कर लिया जाए तो आत्मा का मिलन परमात्मा से अवश्य हो सकता है।
कहना गलत न होगा कि बंधन और मोक्ष को प्राप्त कराने वाला खुद का मन ही है।
आशा
नगर स्थित विघ्नेश्वर नाथ महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में
स्वामी अक्षयानंद ने बाराह भगवान के अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि जन
हिरण्याक्ष दैत्य ने भू देवी का हरण किया तो भगवान ने बाराह अवतार धर उसका
वध किया और भू देवी को छुड़ाया।
उन्होंने हिरण्याक्ष का अर्थ बताया कि
जिसका मन और आंखें सोने अर्थात धन दौलत में ही आसक्त रहे वही हिरण्याक्ष
है। इसके बाद भगवान कपिल ने अपनी माता को बहुत सुंदर उपदेश दिया, जिसे कपिल
गीता के नाम से जाना जाता है। कपिल भगवान ने ही सांख्य शास्त्र का वर्णन
किया है।
स्वामी ने इंद्रियों के बारे में कहा कि अपनी ही इंद्रियों पर
काबू न रख पाने वाले व्यक्ति को यही इंद्रिया शत्रु बन जाती हैं। उन्होंने
तप के महत्व को बताते हुए कहा कि तपबल से ब्रह्मा सृष्टि सृजन करते हैं।
तप बल विष्णु पालन पोषण और तपबल से शंकर संहार करते हैं।
तपबल से मनुशतरूपा
और ध्रुव ने भगवान को प्रकट होने को विवश कर दिया। इस मौके पर इस दिन भी
सजीव झांकी का आयोजन किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रही। इस मौके पर स्वामी
राम चैतन्य महाराज, रामशरण, आदित्य नारायन त्रिवेदी, सतीश सिंह सोमवंशी,
राजीव बाजपेई, हरिनंदन द्विवेदी, शिक्षय बाजपेई, कमलेश
सिंह आदि मौजूद थे।