एआरटीओ कार्यालय सिर्फ बाहरी लोगों के लिए वरदान
साबित हो रहा है, वहीं आम लोगों के लिए समस्या बनता जा रहा है। कार्यालय
में लाइसेंस बनाने को आम लोगों को जहां मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं बाहरी
लोगों की मदद से बगैर टेस्ट के लिए लाइसेंस जारी हो जाते हैं।
कार्यालय में
चल रहे इस खेल से सभी वाकिफ होते हुए भी जिम्मेदार इस ओर से आंखें मूंदे
हुए हैं। ज्ञात हो कि एआरटीओ कार्यालय में प्रतिदिन सैकड़ों लोग लाइसेंस
आदि बनवाने के लिए पहुंचते हैं। इसके लिए विभाग ने अलग-अलग काउंटर बना रखे
हैं।
इसके साथ ही सभी के लिए एक निर्धारित शुल्क है और उसका निर्धारित
प्रोसीजर भी है। इसके तहत आम लोग आसानी से लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं, पर
यह सभी सुविधाएं विभाग में सिर्फ दीवारों पर लगे बोर्ड तक ही सिमट कर रह
गई है। हकीकत में आम लोग बगैर बाहरी की मदद से कार्यालय में कोई भी
कार्य समय से नहीं करा सकते हैं।
बायोमैट्रिक लाइसेंस के लिए तो आवेदकों को
सुबह से शाम तक चक्कर लगाने होंगे, मगर उनका लाइसेंस जारी हो जाए, यह संभव
नहीं है। इससे यहां आने वाले आवेदक परेशान भटकते रहते हैं, जिसका लाभ वहां
पर लगे बाहरी लोग उठा रहे हैं। सभी जिम्मेदारों को इस बात की जानकारी है,
पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
उधर, बायोमैट्रिक लाइसेंस के लिए तहसील से
जारी निवास प्रमाण पत्र, मतदाता पहचान पत्र, फोटो युक्त निर्वाचन कार्यालय
से प्रमाणित वोटर लिस्ट, एलआईसी बीमा बांड व नवीनतम रशीद, पासपोर्ट, सरकारी
कर्मचारी को कार्यालय द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र में से एक लगाया जा
सकता है।
उधर, दो पहिया अस्थाई लाइसेंस को आवेदक को 30 रुपये, चार पहिया
वाहन के लिए 60 रुपये और स्थायी लाइसेंस के लिए दो पहिया वाहन के लिए 250
रुपये और चार पहिया वाहन के लिए 300 रुपये देने होते है। विभाग में तैनात
बाहरी लोग अस्थाई लाइसेंस के लिए पांच से सात सौ और स्थायी के लिए
13 सौ से 15 सौ रुपये वसूल रहे हैं।