गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार से ही जिले
के प्रमुख चौराहे व इमारतें रोशनी से नहाती नजर आईं, तो वहीं सरकारी व गैर
सरकारी कार्यालयों में दिन भर तैयारियों का दौर जारी रहा। शहर के प्रमुख
चौराहों को भी दुल्हन की तरह सजा दिया गया। गांधी भवन में जहां एक ओर गांधी
की प्रतिमा की सफाई और धुलाई का काम चला, वहीं अन्य कार्यक्रम स्थलों को
लेकर भी साफ सफाई करने का प्रयास किया जाता रहा।
गणतंत्र दिवस का जश्न
पूरे देश के साथ ही जिले में भी सोमवार को मनाया जाएगा। इसको लेकर पिछले
काफी समय से तैयारियों का दौर तो चल ही रहा था, पर पूर्व संध्या आते आते ही
तैयारियां और गति पकड़ गई। शहर के प्रमुख चौराहों जिंदपीर चौराहा, सिनेमा
चौराहा, नुमाइश चौराहा, स्वर्ण जयंती चौराहा, समस्त सरकारी व गैर सरकारी
भवनों पर प्रकाश व्यवस्था एवं साज सज्जा के दावे किए गए।
स्वतंत्रता दिवस
पर आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करते हुए डीएम रमेश
मिश्र ने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे समस्त धार्मिक संस्थाओं द्वारा
सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित होगी। आठ बजे प्रभात फेरी का आयोजन होगा।
साढ़े आठ बजे सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों, भवनों पर ध्वजारोहण,
राष्ट्रगान एवं संविधान में उल्लिखित संकल्प को दोहराया जाएगा।
सुबह नौ
बजे महापुरुषों, अमर शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों पर
माल्यार्पण तथा जिला जेल और गांधी भवन में सेनानी स्मारकाें पर श्रद्धांजलि
अर्पित की जाएगी। इसके बाद साढ़े नौ बजे से पुलिस लाइन में परेड व अन्य
रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन होगा। उधर, सेनानी भोला सिंह ने बताया कि
सेनानियों ने भी राष्ट्रभक्ति दिखाने व देश को आजाद करवाने के लिए क्या
क्या नहीं किया होगा इसका अनुमान लगाना ही काफी मुश्किल है।
न सिर्फ भूखे
प्यासे रहकर इन लोगों ने प्रखर राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया, बल्कि तप की
पराकाष्ठा का भी अनूठा नमूना प्रस्तुत किया। लखनऊ में बुलाए गए सेनानियों
ने जब गाजर खाकर अपने पेट की भूख शांत का किस्सा आज भी उनके बीच जिंदा है।
बताया
कि सेनानियों को स्वयं सेवक के रूप में लखनऊ बुलाया गया। जैसे तैसे पैसे
के अभाव में हरदोई आए और यहां से चलने के बाद दूसरे दिन लखनऊ पहुंचे। भूख
से व्याकुल दोपहर हो गई सब एक दूसरे का मुंह देख रहे थे। जत्थे का निरंजन
सिंह देव व बाबू छेदा लाल कर रहे थे।
एक सेनानी ने देव जी से कहा कि
ग्रामीण क्षेत्र के सेनानी कल रात से भूखे परेशान हैं। देवजी ने गुप्ता जी
को इशारा किया, गुप्ता जी ने अपनी खाली जेबें दिखाने लगे। देव जी ने बताया
कि यही तप है। सब्र करो शाम को सामूहिक भंडारा का इंतजाम है। मेरे पास भी
कुछ नहीं है। केवल आठ आने हैं। आप बीती में अंकित है कि उन्होंने उसी
अठन्नी को एक नवयुवक को बुलाकर कुछ चुपके से कहा और वह अठन्नी दे दी।
वह
पांच या छह सेर गाजर लेकर आया और उसको पानी से धोकर जैसे ही वह आया। लाल
गाजर का मुंह देखने के बाद सेनानियों के मुंह में पानी आ गया और खाने को
सेनानी ऐसे झपटे कि जैसे जंगल में भूखा शेर। इस दृश्य को देखकर निरंजन देव
के मुंह से निकल ही गया कि यह है प्रखर राष्ट्रभक्ति और तप की पराकाष्ठा।