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ईश्वरीय कृपा हो तो भक्त का नाम भी मंत्र के रूप में जपते हैं लोग

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हरदोई। भगवान जब स्वयं भक्त के हो जाते हैं तो संसार भक्त के नाम को मंत्र के रूप में जपने लगता है। प्रताप नगर चौराहा के पास झरोइया गांव में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य संतोष भाई ने उक्त बात कही।
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उन्होंने कहा कि भक्ति जीव को विनम्र बनाती है। जीव के अंदर के ताप को समाप्त करती है। जिस जीव पर ईश्वर की कृपा हो जाती है उसका प्रमाण यह मिलता है कि उस जीव पर सब कृपा करने लग जाते हैं। भगवान की कृपा से पूर्ण भक्त संसार में जीव के कल्याण और ईश्वर-नाम के संकीर्तन के प्रवाह को और तीव्र करने के लिए आते हैं। वामन अवतार की कथा का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि राजा बलि से बावन भगवान ने तीन पग पृथ्वी मांग कर उसके अभिमान को भी नाप लिया। इस अवसर पर मुख्य रुप से बलवंत सिंह, राहुल सिंह, शिवशंकर सिंह, अरुण सिंह, सरोज तिवारी मौजूद रहे।
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