नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को घरों से लेकर मंदिरों तक में सुनाई देती
रही। इसके अलावा श्रद्धालुओं के जयघोष से वातावरण पूरे दिन भक्तिमय बना
रहा। बताया गया कि नवरात्र के चौथे मां कूष्मांडा की इस आराधना की गई।
भक्तों ने पूरे उत्साह से माता का पूजन अर्चन किया। शहर के लगभग सभी
मंदिरों में मां के दर्शनों व उनकी पूजा अर्चना को
लाइन लगी रही। भक्तों की
भीड़ और मां के दर्शनों में आ रही दिक्कतों के बाद भी श्रद्धालुओं के
उत्साह में कोई कमी नही देखी गई। इधर,पंजाबी कालोनी में सजाए गए मां के
दरबार में भी भक्तों के द्वारा आकर उनका पूजन अर्चन करना जारी है। अध्यक्ष
आनंद दीक्षित, अमृत गुप्ता, अभिषेक मल्होत्रा, आकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
इधर,नई बस्ती स्थित
शिव मंदिर पर माता दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कल्लू
ने करवाई और समाज के लोगों के साथ माता रानी का भजन पूजन किया। उधर,
शाहाबाद में जगह-जगह मां की पूजा अर्चना की जा रही है। वही मल्लावां
,माधौगंज व बिलग्राम क्षेत्र में कही देवी माता का जागरण तो कहीं पर हवन
पूजन चल रहा है।
नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व
नवरात्र माता की आराधना क ा सबसे बड़ा पर्व है। इन दिनों में भक्त विभिन्न
तरीकों से माता को मनाते हैं। नवरात्र के दौरान कुमारी कन्याओं को भोजन
कराने का भी प्रचलन है। शास्त्रों में नवरात्र में पूजन का अलग ही महत्व
है। संख्या के आधार पर कन्याओं का पूजन श्रद्धालु को ऐश्वर्य से लेकर
प्रभुत्व तक प्रदान करता है।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि
तीन से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं।
नवरात्र में कन्याओं का पूजन कर उनको भोजन कराने का अलग ही लाभ श्रद्धालु
को प्राप्त होता है। एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग व
मोल, तीन क न्याओं के पूजन अर्चन से धर्म, अर्थ की प्राप्ति, चार कन्याओं
के पूजन से
राज्यपद, पांच से विद्या व छह कन्याओं के पूजन से सिद्धि , सात
से राज्य एवं आठ से संपदा एवं नौ कन्याओं के पूजन से पृथ्वी के प्रभुत्व की
प्राप्ति होती है। शास्त्री ने बताया कि तीन से लेकर नौ साल तक की ही
कन्याओं के पूजन का प्रावधान है। कम या ज्यादा उम्र पूर्णतया वर्जित है।
नवरात्र के अंतिम दिन उनके पूजन व भोज के लिए उनको आमंत्रित
करें। उन्हे
पंक्ति में बैठाकर ऊं कुमाये नम: मंत्र से पूजन करें। इसके बाद रुचि अनुसार
उनको भोजन कराएं। ध्यान यह रखा जाए कि भोजन में मीठा अवश्य रखा जाए। भोजन
के बाद पैर धुलाकर विधिवत कुमकुम से तिलक करें और दक्षिणा देकर उनका पूजन
करें।
काम, क्र ोध व अहंकार सेदूर हो जाता ईश्वर
काम, क्रोध, लोभ व मोह जब तक मनुष्य में मौजूद रहता है तब तक परमपिता
परमेश्वर उससे दूरी बनाए रहते हैं। मानव को यदि भक्ति का परम सुख चाहिए तो
उसे नि विकारों से दूरी बनानी होगी। सांडी रोड स्थित मंगला देवी शक्ति
पीठ ग्राम चचरापुर में व्यास नरेंद्राचार्य ने कहा कि मनुष्य जब अपने जीवन
में अपना यश, पुण्य, सत्कर्म एकत्र कर लेता
है तो उसे खुद ईश्वर की
प्राप्ति होती है। यह ईश्वर के ऊपर है कि वह अपने भक्त को किस रूप में खुश
देखना चाहता है। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने का सबसे बेहतर रास्ता
सन्मार्ग है। इस मौके पर सुनील शास्त्री, मनोज शास्त्री, राघव शास्त्री,
विजय शास्त्री, सनत कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है...
शहर के नुमाइश चौराहा स्थित शिव भोले के मंदिर पर दुर्गा जागरण हुआ। इसमें
हरिद्वार से आए विश्नोई एंड पार्टी के कलाकारोें ने देवी मां केे भजन
सुनाकर श्रोताआें को भावविभोर कर दिया। मां भगवती का दीप प्रज्वलन के
बाद गायक विश्नोई ने गणेश वंदना-सबसे पहले सारे जग मेें तेरी पूजा होरिया,
गणपति बप्पा मोरिया। सुनाकर
श्रृद्धालुओें को भावविभोर कर दिया। शिवम आर्ट
ग्रुप के कलाकारों ने हनुमान, महिषासुर तांडव, शिव-पार्वती व काली आदि की
झांकियां प्रस्तुत कर श्रृद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायिका करिश्मा
ने चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है, पूजा ने मां मुरादें पूरी कर दे
हलुआ बाटूंगी आदि प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान तारारानी की कथा की प्रस्तुति
लोगों को खूब र्भाई। कार्यक्रम में राज्य एससी/एसटी आयोग के सदस्य पीके
वर्मा, भरतपांडे, दीपू, राजेश वर्मा, दिलीप वर्मा, नन्हें, अनिल
श्रीवास्तव, संतोष दीक्षित, ओमी पांडे, ज्ञानी वर्मा, संतोष, आनंद सिंह,
दीपक शुक्ला, ज्ञानी, अनुपम बाजपेई, राहुल, मदन, आनंद सिंह, दीपक शुक्ला
आदि लोग मौजूद रहे।