हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में शिकायतों की जांच का ढांचा खुद सवालों के घेरे में आ गया है। खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ आ रही आर्थिक अनियमितताओं और लापरवाही की गंभीर शिकायतों पर जांच बैठाना महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। हैरत की बात यह है कि एक बीईओ के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी दूसरे बीईओ को ही सौंप दी जाती है। इस आपसी तालमेल के चलते जांच रिपोर्ट या तो ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है या फिर फाइलों के अंबार में दबकर दम तोड़ देती है।
विभाग में पिछले कुछ समय में खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर कई जांच कमेटियों का गठन किया गया। लेकिन नतीजों के नाम पर सिफर ही हाथ लगा। सूत्रों का कहना है कि जब भी किसी बीईओ के खिलाफ जांच शुरू होती है, तो समकक्ष अधिकारी एक-दूसरे का बचाव करने में जुट जाते हैं। जांच आख्या महीनों तक लंबित रखी जाती है और अंततः मामला दबा दिया जाता है।
यह है बानगी
खंड शिक्षा अधिकारी हरियावां अनिल झा और भरखनी के खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी हरियावां अनिल झा के ऊपर लगे आरोपों की जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय और खंड शिक्षा अधिकारी हरपालपुर को जांच अधिकारी बनाया गया था। वहीं सुनील कुमार सिंह पर लगे आरोप की जांच खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के अलावा खंड शिक्षा अधिकारी माधौगंज और खंड शिक्षा अधिकारी पिहानी को करना था। इसके अलावा मिड डे मील में जांच के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी टड़ियावां को वीडियो वायरल होने पर खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ मुख्यालय को जांच अधिकारी बनाया गया था। विकास खंड भरखनी में एक बालिका के मौत के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी के पहुंचने पर बीईओ की जांच कमेटी बनाई गई थी। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी संडीला ब्रजेश त्रिपाठी की ओर से दो माह शिक्षकों की जांच आख्या दबाए रखने खंड शिक्षा अधिकारी की जांच बनाई गई थी।