जिले के 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों की बालिकाओं को हुनरमंद बनाने को जल्द ही शहर में कस्तूरबा ब्रांड की अगरबत्ती महकती दिखेगी। इससे होने वाली आमदनी को भी इन्हीं बालिकाओं के विकास पर खर्च किया जाएगा। ड्राप आउट बालिकाओं के विकास व उत्थान को केंद्र व प्रदेश सरकार अलग-अलग प्रयास करने में लगी हुई हैं।
इसके तहत जल्द ही जिले के 20 कस्तूरबा स्कूलों की बालिकाएं अगरबत्ती बनाना सीखेंगी। बालिकाओं को इस बाबत प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा और कच्चा माल भी स्कूलों को मुहैया कराया जाएगा। इसके बाद कस्तूरबा ब्रांड की अगरबत्तियों को बाजार में बिक्री के लिए उतारा जाएगा।
बिक्री से जो भी मुनाफा होगा, उसे इन्हीं बालिकाओं के विकास पर ही लगाया जाएगा। इसको लेकर अगरबत्ती बनाने वाली मशीनों को सभी कस्तूरबा स्कूलों में भेज दिया गया है। इस बाबत बीएसए डा. बृजेश मिश्रा का कहना है कि बालिकाओं को आगे बढ़ाने को सभी कस्तूरबा स्कूलों को एक- एक अगरबत्ती बनाने वाली मशीन मुहैया कराई जा रही है।
शीघ्र ही रा मैटेरियल पहुंचाकर बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके बाद इन अगरबत्तियों को कस्तूरबा ब्रांड का नाम देकर बाजार में बिक्री कराई जाएगी। उधर, बालिकाओं के स्वास्थ्य को उत्तम एवं बिल्कुल फिट रखने को शिक्षा विभाग ने हर कस्तूरबा स्कूलों को तीन तीन एक्सरसाइज मशीनें, तीन-तीन स्टूस्टर एक्सरसाइज मशीनें, तीन-तीन डिजिटल वेट मशीन मुहैया कराईं गईं हैं।
इसके अलावा हुनरमंद करने को तीन-तीन सिलाई कढ़ाई मशीनों के साथ एक-एक ब्यूटीशियन किट, वोकेशनल ट्रेनिंग किट भी मुहैया कराई गईं हैं।