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अनियमितता में भरावन बीडीओ समेत सात फंसे, नोटिस जारी

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हरदोई। भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में नींव स्तर तक बने पंचायत भवन के लिए छत स्तर तक का भुगतान करने के मामले में जांच कमेटी के अध्यक्ष ने भरावन के खंड विकास अधिकारी को नोटिस जारी किया है। नोटिस में खंड विकास अधिकारी से दो अगस्त तक जवाब देने के लिए कहा गया है। प्राथमिक जांच में खंड विकास अधिकारी को माप पुस्तिका यानी एमबी उपलब्ध न कराने, बिना स्थलीय निरीक्षण किए भुगतान करने, सामग्री खरीद में वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों का उल्लंघन करने का दोषी माना है। बीडीओ के साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार, ग्राम पंचायत अधिकारी और तत्कालीन प्रधान के साथ ही तकनीकी सहायक को नोटिस जारी की गई है।
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भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में नींव स्तर तक बने पंचायत भवन के लिए छत स्तर तक का सवा पांच लाख रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने का खुलासा अमर उजाला ने किया था। खबर को संज्ञान में लेकर डीएम अविनाश कुमार के निर्देश पर सीडीओ आकांक्षा राना ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर आख्या मांगी थी। जांच रिपोर्ट तो अभी तक उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई है, लेकिन पूरे प्रकरण में मनरेगा उपायुक्त ने भरावन के खंड विकास अधिकारी सुधीर कुमार को नोटिस जारी की है। दो अगस्त तक जवाब देने के लिए कहा गया है।
...और ऐसे फंसते चले गए बीडीओ
जारी की गई नोटिस के मुताबिक 26 जुलाई को जांच टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि 12 लाख 1 हजार रुपये से निर्माण होना था। मनरेगा से इसके लिए श्रमांश के तौर पर 7035 रुपये और सामग्री अंश में 5,25,156 रुपये का भुगतान किया गया है। कराया गया निर्माण भुगतान की धनराशि से बेहद कम होने की पुष्टि हुई है। इससे स्पष्ट है कि बिना स्थलीय निरीक्षण के ही बीडीओ ने भुगतान कर दिया। इसके अलावा निर्माण कार्य खलिहान की भूमि पर हो रहा था, जो कि नियम के विपरीत है।
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आखिर एमबी नहीं दिखा पाए बीडीओ
बीडीओ सुधीर कुमार को उक्त कार्य की माप पुस्तिका यानी एमबी दिखाने के लिए कई मौके मनरेगा उपायुक्त ने दिए, लेकिन बीडीओ एमबी नहीं दिखा पाए। इसकी वजह से जांच आख्या को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा पा रहा है। बिना मापांकन के ही उक्त निर्माण का भुगतान किया गया है। नोटिस में पूर्व के शासनादेशों का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि बिना समुचित प्रक्रिया अपनाए सामग्री खरीद क्यों की गई।
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