न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि निस्तारित वादों का कीर्तिमान बनाने की जगह अदालतें वास्तविक रूप से वादकारियों को राहत देने का प्रयास करें तभी राष्ट्रीय लोक अदालत का मकसद सफल होगा। बैंक ऋण वसूली के वादों में मानवीय रुख अपनाएं।
उन्होंने कहा कि नए भवन से प्राधिकरण के कार्यों को गति मिलेगी। वह शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के व नवनिर्मित एडीआर भवन के उद्घाटन मौके पर बोल रहे थे।
प्रशासनिक जज अरविंद कुमार त्रिपाठी सुबह 10 बजे दीवानी न्यायालय परिसर पहुंचे। नव निर्मित एडीआर भवन का फीता काटकर उद्घाटन कर निरीक्षण किया। उन्हाेंने केंद्रीय सभागार में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप जलाकर राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया।
न्यायमूर्ति त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालतों में वादों के निस्तारण का तरीका सुगम व सरल होना चाहिए। लोगों को लोक अदालतों से अधिकतम राहत मिलनी चाहिए।
इस दौरान जनपद न्यायाधीश नरेश जैन, न्यायाधीश कमला सिंह यादव,रामसागर मिर्धा, श्रीकांत वर्मा, हरिहर प्रसाद यादव, विशंभर प्रसाद, सूबा सिंह, अलका श्रीवास्तव,सीजेएम अतुल सिंह,प्राधिकरण सचिव सिविल जज प्रभानाथ त्रिपाठी, कोर्ट मैनेजर अरविंद श्रीवास्तव, संघ अध्यक्ष रामेश्वरप्रसाद बाजपेई, मंत्री कमलेश पांडे मौजूद रहे। संचालन पीके सिंह ने किया।